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राज्यसभा में जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव, विपक्ष ने सभापति के सचिवालय को सौंपा नोटिस

No Confidence Motion: कांग्नेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव लाना विपक्षी पार्टियों के लिए बेहद कष्टकारी निर्णय है, लेकिन संसदीय लोकतंत्र को बचाने के लिए यह कदम उठना पड़ा है.

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राज्यसभा में जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव, विपक्ष ने सभापति के सचिवालय को सौंपा नोटिस

Jagdeep Dhankhar

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राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankhar) को हटाने के लिए विपक्षी इंडिया गठबंधन ने गोलबंदी शुरू कर दी है. धनखड़ के कामकाज से नाराज विपक्षी दलों ने शीतकालीन सत्र में अविश्वास प्रस्ताव (No Confidence Motion) पेश किया है. इंडिया ब्लॉक के 60 सांसदों के हस्ताक्षर वाला नोटिस सभापति के सचिवालय को सौंपा गया है.


कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि जगदीप धनखड़ के अत्यंत पक्षपातपूर्ण तरीके से राज्यसभा की कार्रवाई संचालित करने के कारण यह कदम उठाना पड़ा है. उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, 'राज्यसभा के माननीय सभापति द्वारा अत्यंत पक्षपातपूर्ण तरीक़े से उच्च सदन की कार्यवाही का संचालन करने के कारण INDIA गठबंधन के सभी घटक दलों के पास उनके खिलाफ औपचारिक रूप से अविश्वास प्रस्ताव लाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था.'

अविश्वास प्रस्ताव के लिए 60 सासंदों ने किए हस्ताक्षर
जयराम रमेश ने कहा कि विपक्षी पार्टियों के लिए यह बेहद कष्टकारी निर्णय है, लेकिन संसदीय लोकतंत्र को बचाने के लिए यह कदम उठना पड़ा है. उन्होंने बताया कि यह प्रस्ताव अभी राज्यसभा के महासिचव को सौंपा गया है. इससे पहले आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने बताया कि करीब 60 सांसदों के हस्ताक्षर वाला नोटिस राज्यसभा सभापति के सचिवालय को दिया गया है.


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जानकारी के मुताबिक, इंडिया गठबंधन ने जगदीप धनखड़ को हटाने के लिए करीब 4 महीने में ही तैयारी कर ली थी. उन्होंने अगस्त में जरूरी संख्याबल के हिसाब से अविश्वास प्रस्ताव के लिए विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर करा लिए थे. लेकिन वह आगे नहीं बढ़े, क्योंकि विपक्ष धनखड़ को एक और मौका देना चाहता था. लेकिन सोमवार को शीतकालीन सत्र में  वही रवैये को देखकर आगे बढ़ने का फैसला किया.

क्या सभापति को हटाया जा सकता है?
विपक्ष के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘सभापति का आचरण अस्वीकार्य है. वह बीजेपी के किसी प्रवक्ता से ज्यादा वफादार दिखने का प्रयास कर रहे हैं.’ संविधान के अनुच्छेद 67 में उपराष्ट्रपति की नियुक्ति और उन्हें पद से हटाने से जुड़े तमाम प्रावधान किए गए हैं. संविधान के अनुच्छेद 67(बी) में कहा गया कि उपराष्ट्रपति को राज्यसभा के एक प्रस्ताव, जो सभी सदस्यों के बहुमत से पारित किया गया हो और लोकसभा द्वारा सहमति दी गई हो, के जरिए उनके पद से हटाया जा सकता है.

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