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नीट परीक्षा पेपर लीक मामले पर केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि परीक्षा प्रणाली में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाई जाएगी.
नीट (NEET) परीक्षा के पेपर लीक होने का मामला पूरे देश में काफी समय से सुर्खियों में है. इस मुद्दे को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही है. इसी बीच अब इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री का बयान आया है. मंगलवार (21 जुलाई 2026) को NDA की 'मंगल मिलन' बैठक के दौरान पीएम ने साफ कहा कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करना एक 'घोर पाप' की तरह है. सरकार इस पूरी घटना को बेहद गंभीरता से ले रही है और दोषियों के खिलाफ बिना किसी ढिलाई के सख्त कदम उठाए जा रहे हैं.
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के मुताबिक, पीएम ने बैठक में जोर देकर कहा कि जैसे ही पेपर लीक की खबर सामने आई, जांच एजेंसियों को तुरंत एक्शन में लाया गया. इस पूरे मामले में अब तक 13 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल की सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है. पीएम ने यह भी सुनिश्चित किया कि इस अफरा-तफरी का असर मासूम छात्रों के करियर पर न पड़े. इसी वजह से प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए प्राथमिकता के आधार पर दोबारा परीक्षा कराई गई, जिसके नतीजे भी बिना किसी देरी के समय पर घोषित कर दिए गए.
मेडिकल में दाखिले के लिए होने वाली इस परीक्षा से लाखों युवाओं की मेहनत और उनके माता-पिता के सपने जुड़े होते हैं. ऐसे में लीक की खबर आते ही पूरे देश में गुस्सा फैल गया था और कई छात्र-संगठन सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने लगे. जनता के इस आक्रोश को देखते हुए केंद्र सरकार ने अपनी मंशा साफ कर दी है कि इस मामले में किसी भी गुनहगार को बख्शा नहीं जाएगा.
बैठक में प्रधानमंत्री ने एक बेहद महत्वपूर्ण अपील भी की. उन्होंने कहा कि ऐसे आपराधिक रैकेट को खत्म करने के लिए देश के बड़े और नामचीन वकीलों की मदद ली जानी चाहिए, ताकि अदालत में दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके. पीएम का मानना है कि जब तक इस तरह के गंभीर अपराधों के लिए ऐसी सजा नहीं मिलेगी जो दूसरों के लिए नजीर बने, तब तक नकल माफिया के हौसले पस्त नहीं होंगे.
इसके साथ ही, प्रधानमंत्री ने सभी राज्य सरकारों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर एक साथ आने की बात कही. उन्होंने कहा कि देश की पूरी परीक्षा व्यवस्था को इतना पारदर्शी और मजबूत बनाना होगा कि आगे कभी भी किसी परीक्षा का पेपर लीक न हो सके. केंद्र सरकार का यह सख्त रुख साफ संदेश देता है कि परीक्षाओं की शुचिता से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा.
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