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प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर सोनम वांगचुक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं, वहीं राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवाओं का भारी प्रदर्शन जारी है.
देश भर में नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली व पेपर लीक का मुद्दा अब एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक तूफान का रूप ले चुका है. दिल्ली से लेकर पूरे देश की राजनीति इस वक्त गरमाई हुई है. छात्र सड़क पर उतर आए हैं और उनके समर्थन में विपक्ष के दिग्गज नेताओं से लेकर जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता भी खुलकर सामने आ रहे हैं.
शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर मशहूर पर्यावरणविद् व सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक बीते 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं. उनका कहना है कि लगातार हो रहे पेपर लीक और अनियमितताओं के लिए सीधे तौर पर शिक्षा मंत्री को जिम्मेदारी लेनी चाहिए और उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए.
अनशन के कारण जब वांगचुक की तबीयत ज्यादा बिगड़ी, तो मंगलवार (21 जुलाई 2026) को दिल्ली हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद उन्हें इलाज के लिए गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में शिफ्ट किया गया. सरकार भी इस मामले की गंभीरता को समझ रही है, यही वजह है कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह खुद उनसे मिलने मेदांता पहुंचे. इसे सरकार की तरफ से गतिरोध सुलझाने और वांगचुक से बातचीत का रास्ता साफ करने की एक अहम पहल के रूप में देखा जा रहा है.
इस मुद्दे को लेकर राजधानी के जंतर-मंतर पर देर रात तक युवाओं और छात्रों का भारी जमावड़ा लगा हुआ है. प्रदर्शनकारियों की एक ही जिद है कि जब तक शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं दे देते और छात्रों की समस्याओं का कोई ठोस समाधान नहीं निकलता, वे अपना आंदोलन खत्म नहीं करेंगे.
इसी बीच आंदोलन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने साफ किया है कि उनका प्रदर्शन पूरी तरह से अहिंसक और शांतिपूर्ण है. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक तत्व आंदोलन को बदनाम करने की नीयत से दिल्ली के दूसरे हिस्सों में उपद्रव की साजिश रच रहे हैं, जिनका उनकी पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है. सीजेपी ने देश के मौजूदा हालात को देखते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है और राष्ट्रपति से हस्ताक्षेप की मांग की है.
इस पूरे मामले में सियासी पारा उस समय और चढ़ गया जब मंगलवार को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव अचानक प्रधानमंत्री आवास के पास सड़क पर बैठकर धरना देने लगे. हालांकि, दिल्ली पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए इन सभी बड़े नेताओं को हिरासत में ले लिया था, जिन्हें बाद में देर शाम रिहा कर दिया गया.
रिहा होने के बाद प्रियंका गांधी ने सरकार पर तानाशाही रवैये का आरोप लगाते हुए कहा कि जब विपक्ष को संसद में अपनी बात रखने की इजाजत नहीं दी जाती और न ही जंतर-मंतर पर शांतिपूर्वक विरोध दर्ज करने दिया जाता है, तो उनके पास ऐसे अप्रत्याशित कदम उठाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता. फिलहाल, पुलिस रिहाई के नेता वापस लौट चुके हों.
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