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MP गज़ब है! सरकारी स्कूल की एक दीवार की पुताई में लग गए 233 लोग, 10 खिड़की पेंट करने के लिए 425 मजदूर लगे

मध्य प्रदेश के शहडोल में बड़ा घोटाला सामने आया है. यहां एक दीवार और 10 खिड़कियों को पेंट करने में 658 मिस्त्री और मजदूरों की ज़रूरत पड़ गई. शहडोल के जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा है कि मामले की जांच चल रही है.

MP गज़ब है! सरकारी स्कूल की एक दीवार की पुताई में लग गए 233 लोग, 10 खिड़की पेंट करने के लिए 425 मजदूर लगे
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MP सच में गजब है. यहां के सरकारी स्कूलों में गणित का ऐसा हिसाब देखने को मिला कि अच्छे-अच्छे दंग रह गए. यहां खिलदंडों ने कुछ ऐसा खेल रचाया कि एक दीवार को पेंट करने में 233 मजदूर और मिस्त्रियों की ज़रूरत पड़ गई. इतना ही नहीं, कुल 10 खिड़की और 4 दरवाज़े लगाने में 425 मजदूरों की ज़रूरत पड़ गई.कुछ हजार में निपट जाने वाले काम के लिए तीन लाख रुपये से ज्यादा कमाने की कोशिश की गई.ये घोटाला किया है शहडोल के सुधाकर कंस्ट्रक्शंस ने. शहडोल जिले के ब्योहारी तहसील के दो स्कूलों में काम के बाद सुधाकर कंस्ट्रक्शन द्वारा पेश किया गया बिल सामने आया है. 

पहला स्कूल- एक दीवार, 233 पोतने वाले

सकंदी स्थित सरकारी स्कूल में एक दीवार पेंट करने का बिल लगाया गया है. इस बिल में लिखा है कि पुताई में 168 मजदूर लगे जिन्हें 400 रुपये की दर से पेमेंट की गई. इस तरह 67200 रुपये का लेबर पेंट किया गया. इसी काम में 65 मिस्त्री और लगे जिन्हें 600 रुपये की दर पर पैसे दिए गए. यानी 39000 रुपये मिस्त्रियों को दिए गए. पुताई के लिए 4 लीटर ऑइल पेंट लगा, जिसकी कुल कीमत 784 रुपये थी. इस हिसाब से कुल 1,06,984 रुपये में एक दीवार की पुताई की गई.

दूसरा स्कूल- 4 दरवाजे, 10 खिड़कियां, 425 मजदूर

दूसरा स्कूल निपनिया में स्थित है. यहां, 10 खिड़कियां और 4 दरवाजे लगाए गए. उन्हें पेंट भी किया गया. इस काम में 275 मजदूर लगे. जिन्हें 400 रुपये की दर से पैसे दिए गए. कुल 1,10,000 रुपये. इसके बाद 150 मिस्त्री भी इस काम में लगाए गए. उन्हें 600 रुपये की दर से पैसे दिए गए. कुल 90,000 रुपये. खिड़की-दरवाज़ों के लिए 20 लीटर ऑयल पेंट लगा, वो भी 400 रुपये लीटर वाला. तो उसमें 8000 रुपये लग गए. इसके अलावा 14450 रुपये में 10 खिड़कियां आईं, 9200 रुपये में चार दरवाज़े आए. इस तरह टोटल बिल बना 2,31,650 रुपये का. 

हैरानी की बात ये है कि इन दोनों बिल्स को स्कूल के प्रधानाचार्य और जिला शिक्षा अधिकारी ने अप्रूव कर दिया है. बिल्स पर दोनों के ही सील और हस्ताक्षर हैं. इतना ही नहीं, कानूनी तौर पर सरकारी काम का बिल जमा करते वक्त सबूत के तौर पर काम से पहले और बाद की फोटोज़ जमा करना अनिवार्य होती हैं. इतना ही नहीं, निपनिया का बिल 5 मई को जारी हुआ है, लेकिन उसमें प्रिंसिपल के साइन के नीचे 4 अप्रैल की तारीख लिखी है. लेकिन बिना फोटो के ही बिल अप्रूव कर दिए गए. अब जिला शिक्षा अधिकारी फूलसिंह मारपाची ने कहा, 'दो स्कूलों को बिल सोशल मीडिया पर वायरल हैं. उनकी जांच चल रही है. तथ्यों के आधार पर एक्शन लिया जाएगा.'

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