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MP: मुस्तफा चिश्ती बने मारुति नंदन, धर्म परिवर्तन कर इमाम के बेटे ने अपनाया हिंदू धर्म, जानें पूरा माजरा

मुस्तफा चिश्ती का वास्ता एक मुस्लिम इमाम के परिवार से है. उनके पिता इकबाल अली इस्लामिक व्यक्ति हैं, और भामगढ़ मस्जिद में इमाम हैं. सनातन धर्म में आकर मुस्तफा चिश्ती अब मारुति नंदन हो चुके हैं. आइए जानते हैं पूरी बात.

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MP: मुस्तफा चिश्ती बने मारुति नंदन, धर्म परिवर्तन कर इमाम के बेटे ने अपनाया हिंदू धर्म, जानें पूरा माजरा

मुस्तफा बने मारुति नंदन

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Khandwa Hindu religious conversion: एमपी के खंडवा में धर्म परिवर्तन का एक बड़ा मामला आया है. दरअसल यहां एक मुस्लिम इमाम के बेटे के द्वारा हिंदू धर्म को अपनाने की खबर खूब सुर्खियों में है. सनातन धर्म को स्वीकार करने वाले शख्स का नाम मुस्तफा चिश्ती है. वो भामगढ़ के निवासी हैं. उनकी उम्र 25 साल की है. उनके पिता एक मस्जिद के इमाम हैं. मुस्तफा चिश्ती को सनातन धर्म को अपनाने की पूरी प्रक्रिया को संपन्न कराते हुए हिंदू बनाया गया है. मुस्तफा ने बताया कि उनका रुझान बचपन से ही सनातन धर्म में था, वो शुरू से ही भगवान श्री राम के भक्त थे. धर्म परिवनर्तन के क्रम में मुस्तफा को महादेवगढ़ मंदिर में पवित्र गंगाजल और नर्मदा जल से स्नान कराया गया. उसके बाद उन्होंने भगवा रंग के कपड़े पहने, और शीव जी और हनुमान जी की आरती की. सनातन धर्म में आकर मुस्तफा चिश्ती अब मारुति नंदन हो चुके हैं. उन्हें अब ये नया  हिंदू नाम मिला है. 

बचपन से ही सनातन की ओर रुझान
मुस्तफा चिश्ती का वास्ता एक मुस्लिम इमाम के परिवार से है. उनके पिता इकबाल अली इस्लामिक व्यक्ति हैं, और भामगढ़ मस्जिद में इमाम के तौर पर रहते हैं. मुस्तफा को बचपन से ही हिंदू धर्म से लगाव रहा था. वो भामगढ़ में मौजूद 500 साल प्राचीन मंदिर में धार्मिक किस्से सुनते हुए बड़े हुए थे. वो मंदिर के पुजारियों से प्रभु श्री राम और हनुमान जी के प्रसंग सुना करते थे. रामायण में उनकी खूब रुची थी. वो इन प्रसंगों से खूब प्रभावित होते थे. यही कारण है कि उनकी आस्था श्री राम और हनुमान जी के प्रति दिनों-दिन बढ़ती चली गई.

दोस्तों ने भी किया था धर्म परिवर्तन
मुस्तफा चिश्ती यानी मारुति नंदन के दो मित्रों ने पहले ही इस्लाम को छोड़कर सनातन धर्म को स्वीकार कर लिया था. मुस्तफा के ये दोनों दोस्त फिरोज और इमरान थे. फिरोज अब राहुल बन चुके हैं, वहीं इमरान अब ईश्वर के नाम से पहचाने जाते हैं. हिंदू बनने के बाद उन्होंने भी मुस्तफा को सनातन धर्म में आने का निवेदन किया था. उनके हिंदू बन जाने से मुस्तफा में भी सनातनी बनने के विचार आए.


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