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आईआईटी कानपुर में विजिटिंग प्रोफेसर रघुराम मुर्तुगुड्डे का कहना है कि मानसून की बारिश में लंबा गैप आना, ये एल नीनो का प्रभाव है. इसकी वजह से उपमहाद्वीप की हवा ऊपर उठने के बजाय नीचे की तरफ जा रही है.
मानसून सीजन में इस बार बारिश लंबे-लंबे ब्रेक के बाद हो रही है, जिसकी वजह से लोग गर्मी से परेशान तो हैं ही, लेकिन खेती-किसानी पर भी इसका बुरा असर पड़ रहा है. 10 दिन से भी ज्यादा लंबे अंतराल के बाद सोमवार (21 जुलाई, 2026) को देर रात दिल्ली एनसीआर में बारिश हुई. ज्यादातर राज्यों में मानसून का यही पैटर्न नजर आ रहा है, जिसे यो-यो पैटर्न कहते हैं.
ग्लोबल वॉर्मिंग और एल नीनो से बदल रहा मानसून का पैटर्न
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्लोबल वॉर्मिंग और एल नीनो की वजह से मानसून के पैटर्न में यह बदलाव देखा जा रहा है, जो खेती-किसानी को नुकसान पहुंचा रहा है और पावर ग्रिड पर दबाव बढ़ रहा है. इस साल जून में बेतहाशा गर्मी पड़ी है, जबकि बारिश सामान्य से 40 प्रतिशत कम हुई है. वहीं, जुलाई महीने की शुरुआत में मुंबई समेत कई राज्यों में जोरदार बारिश देखने को मिली. आमतौर पर मानसून में कई दिनों या हफ्तों लगातार बारिश होती है और उसी के आधार पर किसान बुवाई, सिंचाई और फसल के लिए कैलेंडर तैयार करते हैं. हालांकि, यो-यो मानसून किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है.
क्या होता है यो-यो मानसून?
यो-यो मानसून में सामान्य मानसून की तरह लंबे समय तक लगातार बारिश जैसी स्थिति नहीं होती है. इसमें पहले बारिश में लंबा ब्रेक, फिर अचानक तेज बारिश होती है, फिर दोबारा सूखे का दौर आता है और फिर कम समय में भारी बारीश होती है.
एल नीनो क्या है?
एल नीनो एक ऐसी जलवायु प्रक्रिया है, जिसमें प्रशांत महासागर के ऊपर चलने वाली हवाओं और समुद्र की सतह के तापमान में बदलाव होता और इसका असर दुनियाभर के मौसम पर पड़ता है.
यो-यो मानूसन में स्पंज बन जाता है वायुमंडल
आईआईटी कानपुर में विजिटिंग प्रोफेसर रघुराम मुर्तुगुड्डे का कहना है कि ग्लोबल वॉर्मिंग और एल नीनो की वजह से वायुमंडल एक स्पंज की तरह काम करता है, जो बहुत सारा पानी सोख लेते है और फिर एक ही जगह पर पूरा पानी ड़ाल देता है.
देश की आधी से ज्यादा कृषि भूमि सिंचाई के लिए बारिश पर निर्भर है, ऐसे में लंबे समय तक बारिश पर ब्रेक और फिर अचानक बहुत ज्यादा पानी गिरने की वजह से ग्रीष्मकालीन फसलों की बुवाई बाधित हो रही है. इसकी वजह से किसानों की आय पर संकट मंडरा रहा है और खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी का भी खतरा है.
कैसे बारिश होने से रोक रहा एल नीनो?
रघुराम मुर्तुगुड्डे का कहना है कि मानसून की बारिश में इतना लंबा गैप आना, ये एल नीनो का प्रभाव है. इसकी वजह से उपमहाद्वीप की हवा ऊपर उठने के बजाय नीचे की तरफ जा रही है. उन्होंने बताया कि जब हवा ऊपर की तरफ जाती है तो वह अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी लेती है, फिर बादल बनते हैं और बारिश होती है. वहीं, जब मानसूनी हवाओं का रुख नीचे की तरफ होता है तो वह वातावरणीय आवरण की तरह काम करती है और बादल बनने से रोकती है और इसलिए ह्यूमिडिटी बढ़ती है.
प्राइवेट मौसम पूर्वानुमान कंपनी स्काईमेट वेदर सर्विसेज में मौसम वैज्ञानिक जी. पी. शर्मा ने कहा कि भारत में मानसून की अवधि लंबी होती है इसलिए उसमें उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं, लेकिन इस बार मानसून बहुत ज्यादा अजीब व्यवहार कर रहा है.
उन्होंने बताया कि मानसून में ये उतार-चढ़ाव समुद्र तल से 20,000 से 25,000 फीट ऊपर की दिशा तय करने वाली धाराओं की वजह से देखने को मिल रहा है. ऐसे में वर्षा के लिए जो स्थिति पैदा होती है वह वायुमंडलीय अवरोधक के कारण पैदा नहीं हो पा रही है, जिस वजह से मानसूनी निम्न दबाव या तो रुक जाता है या अपने मार्ग से भटक जाता है.
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