भारत
देश में उत्तर से लेकर पश्चिम तक कई राज्यों में गर्मी का सितम जारी है, जहां एक तरफ लोग लू से परेशान हैं. वहीं किसानों की बुवाई तक नहीं हो पा रही है. ऐसे में जानते है कि आखिर इस बार मानसून क्यों रुक गया है. इसमें देरी क्यों हो रही है.
.गर्म हवाएं बनीं मानसून के रुकावट की बड़ी वजह
.भूमध्य रेखा से आने वाली हवाएं मानसून की रफ्तार बढ़ाने में निभाएंगी बड़ी भूमिका
.मानसून की देरी से न सिर्फ फसल रुकेगी. इससे महंगाई पर भी असर पड़ेगा
.मानसून की देरी ने आम लोगों से लेकर किसानों तक की मुश्किलें बढ़ा रही है
भारत में इस बार कई हिस्से ऐसे हैं, जहां लोग गर्मी और लू से परेशान हैं. इससे राहत पाने के लिए मानसून का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन मानसून के एक ही जगह पर रुकने की वजह से उनका यह इंतजार और भी लंबा होता जा रहा है, इतना ही नहीं इसका प्रभाव अब खेती और बुआई पर भी पड़ने लगा है. किसान जमीन में नमी के लिए आसमान की तरफ देख रहे हैं, लेकिन मौसमी वर्षा की कमी और भी बढ़ गई है. इसकी वजह से न सिर्फ किसान, जल प्रबंधकों और मौसम वैज्ञानिकों में भी चिंता बढ़ गई है. ऐसे में हर कोई जानना चाहता है कि आखिर मानसून आने में इतनी देरी क्यों हो रही है. मानसून कहा अटका है. इसकी वजह क्या है...
दरअसल, मानसून की शुरुआती तेज रफ्तार के बाद उसकी गति पिछले 2 सप्ताह से रुक गई है. अब मौसम विभाग की नजर तीन ऐसे बदलावों पर है, जो अगले कुछ दिनों में पूरे देश के मौसम की तस्वीर बदल सकते हैं. अगर ये संकेत मजबूत होते हैं तो महाराष्ट्र से लेकर उत्तर भारत तक बारिश का दौर शुरू हो जाएगा.
मौसम विभाग के अनुसार, मानसून की रफ्तार थमने की सबसे बड़ी वजह पश्चिम और मध्य भारत में लगातार आ रही गर्म हवाएं हैं. इन हवाओं ने वातावरण में मौजूद नमी को कमजोर कर दिया, जिससे बड़े पैमाने पर बादल विकसित नहीं हो पा रहे हैं. नतीजा यह हुआ कि कई राज्यों में बारिश की गतिविधियां सीमित रहीं और तापमान फिर से बढ़ने लगा. इसका सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है, क्योंकि खरीफ फसलों की बुवाई का सही समय मानसूनी बारिश पर निर्भर करता है. हालांकि अब राहत की खबर यह है कि अरब सागर और पश्चिमी तट के आसपास नमी धीरे-धीरे लौट रही है. मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि 20 जून के बाद यह बदलाव और स्पष्ट दिख सकता है.
भारतीय मानसून का एक अहम इंजन सोमाली जेट कहलाता है. यह पूर्वी अफ्रीका से अरब सागर के ऊपर बहने वाली तेज हवाओं की धारा है, जो भारी मात्रा में नमी भारत तक पहुंचाती है. इस साल यह सामान्य से कमजोर रही है. इसकी वजह से अरब सागर से आने वाली नमी का प्रवाह प्रभावित हुआ. यही वजह है कि कई राज्यों में अपेक्षित बारिश नहीं हो सकी. अब मौसम मॉडल संकेत दे रहे हैं कि आने वाले दिनों में यह जेट मजबूत हो सकता है. अगर ऐसा होता है तो महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और मध्य भारत में मूसलाधार बारिश हो सकती है. इससे आम लोगों से लेकर किसानों को बड़ी राहत मिलेगी.
मानसून केवल बादलों का खेल नहीं है. इसके पीछे समुद्र और वायुमंडल की जटिल प्रक्रियाएं काम करती हैं. इनमें से एक भूमध्य रेखा पार करने वाली नमीयुक्त हवाएं हैं. ये हवाएं दक्षिणी गोलार्ध से नमी लेकर हिंद महासागर के रास्ते भारत की ओर बढ़ती हैं, जब इनकी ताकत बढ़ती है, तो मानसून को आगे बढ़ने के लिए लगातार ऊर्जा और नमी मिलती रहती है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ दिनों में इन हवाओं की गति भी मजबूत हो सकती है. इससे मानसूनी परिसंचरण दोबारा सक्रिय होने की संभावना बढ़ेगी.
मानसून में देरी का असर केवल मौसम तक सीमित नहीं रहता है. अगर बारिश लंबे समय तक कम रहती है तो खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित होती है. इससे आगे चलकर सब्जियों, दालों और अन्य कृषि उत्पादों की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है. यही वजह है कि मौसम विभाग की हर नई अपडेट पर किसान, व्यापार जगत और सरकार की नजर बनी हुई है. अच्छी बारिश सिर्फ खेतों के लिए नहीं, बल्कि महंगाई को कंट्रोल करने और जल संकट से बचने के लिए भी बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है.
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि अगले कुछ दिनों में पश्चिमी तट पर लगातार बादल बनने लगते हैं और अरब सागर से नमी का प्रवाह बढ़ता है, तो मानसून अचानक तेज गति पकड़ सकता है. कई बार लंबे ठहराव के बाद मानसून एक ही सप्ताह में सैकड़ों किलोमीटर आगे बढ़ जाता है.ऐसे में भले ही कई इलाकों में बारिश का लंबा इंतजार हो रहा हो, यहां अगले कुछ दिनों में ही बारिश हो सकती है.
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