भारत
देश में मंकीपॉक्स के बढ़ते मामलों के बीच अब वैक्सीन की जरूरत पर भी चर्चा शुरू हो गई है. इसके बारे में जब सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ से पूछा गया तो उन्होंने यह जवाब दिया.
डीएनए हिंदी: कोरोना के कहर के बाद अब मंकीपॉक्स ने भी देश में पैर पसारना शुरू कर दिया है. इस बीमारी से ग्रस्त 8 मरीज सामने आ चुके हैं. इनमें से 5 विदेश यात्रा करके लौटे थे.ऐसे में इस बीमारी से जुड़ी वैक्सीन को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है. इस चर्चा के बीच सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला का अहम बयान सामने आया है. उन्होंने कहा है कि मंकीपॉक्स की वैक्सीन के लिए रिसर्च जारी है.
पूनास्वाला ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया को मंगलवार को हुई एक बैठक में यह जानकारी दी. स्वास्थ्य मंत्री ने भी राज्यसभा में यह जानकारी साझा की. उन्होंने कहा कि अभी मंकीपॉक्स के वैक्सीनेशन को लेकर शोध किए जा रहे हैं. इसमें सिर्फ उन्हीं लोगों के वैक्सीनेशन की जरूरत है जो संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आते हैं. इस बीमारी में पूरे देश में हर व्यक्ति के वैक्सीनेशन की जरूरत नहीं है.
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केंद्र सरकार ने जारी की गाइडलाइन
मंकीपॉक्स को लेकर केंद्र सरकार गाइडलाइन भी जारी कर चुकी है. अब मंकीपॉक्स के संपर्क में आए लोगों को 21 दिन का आइसोलेशन जरूरी होगा. दरअसल इस बीमारी में इन्क्यूबेशन पीरियड 21 दिनों का है. अगर किसी को यह बीमारी हो जाए तो उसका प्रभावित त्वचा को पूरी तरह ढकना जरूरी है. वहीं मास्क लगाना भी अनिवार्य है.
कैसे फैलता है मंकीपॉक्स
मंकीपॉक्स आमतौर पर बुखार, ठंड लगने, चेहरे या जननांगों पर दाने और घाव का कारण बनता है. यह किसी संक्रमित व्यक्ति या उसके संपर्क में आने की वजह से भी फैलता है. संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने, यौन संबंध बनाने या उसकी इस्तेमाल की हुई चीजों के इस्तेमाल से भी बीमारी फैलने का खतरा है.
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