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मोदी सरनेम केस: सुप्रीम कोर्ट में राहुल गांधी का जवाब, 'माफी मांगने का सवाल ही नहीं है'

Modi Surname Case: राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपने एफिडेविट में कहा है कि वह मोदी उपनाम केस में किसी भी तरह की माफी नहीं मांगने वाले हैं.

मोदी सरनेम केस: सुप्रीम कोर्ट में राहुल गांधी का जवाब, 'माफी मांगने का सवाल ही नहीं है'

इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के एक इवेंट में राहुल गांधी. (तस्वीर-PTI)

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डीएनए हिंदी: मोदी उपनाम केस में राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी. इसी मामले में पूर्णेश मोदी ने भी अपना जवाब दायर किया था. अब राहुल गांधी की ओर से एफिडेविट दायर की गई है. इसमें राहुल गांधी ने कहा है कि वह माफी तो बिल्कुल नहीं मांगने वाले हैं. साथ ही, यह भी कहा है कि अगर उन्हें माफी मांगनी ही होती तो वह बहुत पहले ही मांग चुके होते. राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में दायर एफिडेविट में कहा है कि उनके केस को एक 'अपवाद' के रूप में देखा जाए और उन्हें आरोपों से मुक्त किया जाए. 

इस एफिडेविट में राहुल गांधी ने कहा है कि उन्होंने हमेशा यह स्पष्ट रखा है कि वह इस मामले में दोषी नहीं हैं और अगर उन्हें इस अपराध के लिए माफी मांगना ही होता तो वह पहले ही मांग चुके होते. एफिडेविट में यह भी कहा गया है कि गुजरात के बीजेपी विधायक पूर्णेश मोदी ने अपने जवाब में राहुल गांधी को सिर्फ इस वजह से 'घमंडी' कहा क्योंकि उन्होंने माफी मांगने से इनकार कर दिया.

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एफिडेविट में दिए गए तमाम तर्क
राहुल गांधी ने अपने जवाब में कहा है, 'रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल्स ऐक्ट की आपराधिक प्रक्रिया और नियमों का इस्तेमाल करके बिना किसी गलती के माफी मांगने के लिए मजबूर करना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है.' उन्होंने कोर्ट से अपील की है कि इस मांग को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए. राहुल गांधी ने यह भी कहा कि अपराध की 'मामूली' प्रवृत्ति को देखते हुए इस केस को अपवाद माना जाए. साथ ही, यह भी ध्यान में रखा जाए कि इससे एक सांसद के रूप में उन्हें जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई नहीं हो सकती है.

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उन्होंने अपने एफिडेविट में कहा है कि उनके बयान से याचिकाकर्ता (पूर्णेश मोदी) को किसी तरह की हानि नहीं नहीं हुए है. ऐसे में राहुल गांधी की सजा पर रोक लगाई जाए ताकि वह मौजूदा लोकसभा की बैठकों और आगामी सत्रों में हिस्सा ले सकें. बता दें कि राहुल गांधी के 'मोदी उपनाम' वाले बयान के मामले में गुजरात की एक अदालत ने उन्हें दोषी करार देते हुए दो साल की सजा सुनाई है. दो साल की सजा होते ही उनकी लोकसभा सदस्यता भी रद्द कर दी गई थी.

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