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Modi Govt ने जन गण मन को बताया वंदे मातरम के बराबर, Delhi HC में रखा अपना पक्ष

Delhi High Court में केंद्र सरकार ने राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत को लेकर एक अहम हलफनामा दायर किया है.

Modi Govt ने जन गण मन को बताया वंदे मातरम के बराबर, Delhi HC में रखा अपना पक्ष
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डीएनए हिंदी: देश में राष्ट्रगान यानी जन गण मन और राष्ट्रीय गीत यानी वंदे मातरम को लेकर काफी विवाद हो चुके हैं. अल्पसंख्यक वर्ग लगातार राष्ट्रीय गीत का विरोध करते रहे हैं. इन सबके बीच अब दिल्ली हाई कोर्ट में मोदी सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि जन गण मन और वंदे मातरम पूरी तरह बराबर हैं और दोनों में किसी भी प्रकार का छोटा या बड़ा वाला देश प्रेम का भाव नहीं है.

दरअसल केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा है कि राष्ट्रगान जन गण मन और राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम का दर्जा एक समान है और नागरिकों को दोनों ही बराबर सम्मान देना चाहिए. यह बात जनहित याचिका पर जवाब देते हुए कही गई है. आपको बता दें कि इस याचिका में मांग की गई थी कि वंदे मातरम को भी वही दर्जा और सम्मान मिलना चाहिए, जो राष्ट्र गान को दिया जाता है. 

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क्या थी याचिका की प्रमुख मांगें?

दिल्ली हाईकोर्ट में दायर की गई एक जनहित याचिका में यह मांग की गई थी वंदे मातरम् को जन गण मन जैसा सम्मान दिया जाए. राष्ट्रीय गीत के सम्मान को लेकर गाइडलाइंस तैयार की जाए. ऐसे में इस अहम मुद्दे पर दिल्ली हाईकोर्ट ने होम मिनिस्ट्री, शिक्षा मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय एवं कानून मंत्रालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था जिस पर जवाब देते हुए केंद्र सरकार ने दोनों का समान दर्जा होने की बात कही है.  

दिल्ली हाईकोर्ट में दायर इस जनहित याचिका में यह मांग भी की गई है कि केंद्र और राज्य सरकारों को आदेश दिया जाए कि वे तय करें कि हर वर्किंग डे पर स्कूलों एवं अन्य शिक्षण संस्थानों में जन गण मन और वंदे मातरम गाया जाए. इसके अलावा संविधान सभा में 24 जनवरी, 1950 को पारित प्रस्ताव के मुताबिक दोनों के सम्मान के लिए गाइडलाइंस तय की जाएं.

किसने दायर की थी याचिका

आपको बता दें कि इस मांग के याचिकातकर्ता बीजेपी नेता और वरिष्ठ वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय हैं. उन्होंने अपने बयान में कहा है. भारत राज्यों का संघ है. यह फेडरेशन नहीं है. हमारी एक ही राष्ट्रीयता है और वह भारतीयता है. हम में से सभी की जिम्मेदारी है कि वंदे मातरम का सम्मान करें.

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गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में विशेष समुदाय के लोगों ने वंदे मातरम न गाने और इससे धार्मिक भावनाएं आहत होने की बात कही थी. इसको लेकर याचिकाकर्ता ने कहा कि यह बात समझ से परे है कि कैसे वंदे मातरम से किसी की भावनाएं आहत हो सकती हैं जबकि दोनों को ही संविधान निर्माताओं ने चुना है. उन्होंने कहा कि जन गण मन में राष्ट्र की भावना सामने आती है.

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