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कौन हैं Alok Joshi? जिनके नाम से ही कांपने लगता है पाकिस्तान, मोदी सरकार ने सौंपी NSA बोर्ड की कमान

Alok Joshi NSA Board Chairman: आलोक जोशी भारतीय खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग यानी RAW के चीफ रहे हैं. वह पाकिस्तान के खिलाफ कई ऑपरेशन्स में अहम भूमिका निभा चुके हैं.

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कौन हैं Alok Joshi? जिनके नाम से ही कांपने लगता है पाकिस्तान, मोदी सरकार ने सौंपी NSA बोर्ड की कमान

Alok Joshi

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जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चल रहा है. भारत आतंकवाद के खिलाफ कड़ा एक्शन लेने की तैयारी कर रही है. इस बीच भारत सरकार ने नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजरी बोर्ड (NSAB) में बड़ा बदलाव किया है. पूर्व RAW चीफ आलोक जोशी को एनएसएबी का अध्यक्ष बनाया गया है. उनके साथ बोर्ड में कुल 7 मेंबर्स होंगे. बोर्ड में रिटायर पूर्व सैनिकों और आईपीएस को भी शामिल किया गया है.

आलोक जोशी के साथ एनएसए बोर्ड में पूर्व दक्षिणी सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल AK सिंह, पूर्व पश्चिम वायुसेना कमांडर एयर मार्शल पीएम सिन्हा और रियर एडमिरल मोंटी खन्ना भी होंगे. पूर्व IPS राजीव रंजन वर्मा और मनमोहन सिंह को भी सदस्य बनाया गया है. नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजरी बोर्ड के पुनर्गठन की वजह इसमें नई ऊर्जा और जोश भरना है. एनएसएबी में इससे पहले 2018 में बदलाव किया गया था.

पाकिस्तान के खिलाफ कर चुके हैं ऑपरेशन!

पहलगाम आतंकी हमले के बाद NSA बोर्ड में बदलाव काफी अहम माना जा रहा है. क्योंकि आलोक कुमार पाकिस्तान और नेपाल में कई महत्वपूर्ण ऑपरेशन्स को अंजाम देने में अहम भूमिका निभा चुके हैं. उन्हें पाकिस्तान की हर नब्ज की पता है. वहां उनका खुफिया तंत्र बहुत स्ट्रॉन्ग है. आलोक कुमार साल 2012 से 2014 तक भारतीय खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग यानी RAW के चीफ रहे हैं. इसके बाद उन्होंने NTRO के चेयरमैन के रूप में भी सेवा दी है.

NSAB कब हुआ गठन और क्या है भूमिका?

नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजरी बोर्ड भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिसा है. देश की सुरक्षा के मद्देनजर बोर्ड दीर्घकालिक विश्लेषण और सुझाव सरकार को देता है. एनएसएबी का गठन साल 1998 में अटर बिहारी वाजपेयी की सरकार के दौरान हुआ था. बोर्ड हर महीने कम से कम एक बैठक करता है. जिसमें देश के सुरक्षा मुद्दों पर मंथन किया जाता है.

NSAB ने 2001 में परमाणु सिद्धांत का मसौदा तैयार कर महत्वपूर्ण योगदान दिया था. इसके अलावा 2002 में रणनीतिक रक्षा समीक्षा और 2007 में राष्ट्रीय सुरक्षा समीक्षा भी शामिल है. पहलगाम हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच जिस तरह से तनाव चल रहा है, उसमें बोर्ड से आतंकवाद विरोधी रणनीतियों, साइभर खतरों और आधुनिक सुरक्षा की चुनौतियों से निपटने में मदद की अपेक्षा होगी.

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