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डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीजा की फीस में बढ़ोतरी करते हुए 1,00,000 डॉलर (करीब 88.10 लाख रुपये) कर दी, जो पहले 5 लाख हुआ करती थी. भारत ने ट्रंप के इस कदम की निंदा की है.
अमेरिका के H-1B वीजा के नियम सख्त करने पर भारतीय विदेश मंत्रालय की पहली प्रतिक्रिया आई है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले से परिवारों को थोड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. भारत सरकार इन रिपोर्टों को देख रही है. इसके पूरी तरह प्रभावों का अध्ययन किया जाएगा.
MEA ने कहा कि भारत और अमेरिका दोनों इंडस्ट्रीज इनोवेशन और रचनात्मकता में रुचि है और उनसे आगे के सर्वोत्तम मार्ग पर परामर्श की अपेक्षा की जा सकती है. कुशल प्रतिभाओं की गतिशीलता और आदान-प्रदान ने संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत में टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट, इनोवेशन, आर्थिक विकास, प्रतिस्पर्धात्मकता और धन सृजन में अत्यधिक योगदान दिया है, इसलिए अमेरिकी सरकार के इस फैसले का मूल्यांकन करेंगे, जिसमें दोनों देशों की जनता के बीच मजबूत संबंध भी शामिल हैं.
रणधीर जायसवाल ने कहा कि इस उपाय के परिवारों के लिए उत्पन्न व्यवधान के रूप में मानवीय परिणाम होने की संभावना है. सरकार को उम्मीद है कि अमेरिकी अधिकारी इन व्यवधानों का उचित समाधान कर सकते हैं.
इससे पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B Visa प्रोग्राम में बड़े बदलाव करने के लिए एक घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए. ट्रंप के नए घोषणा पत्र के मुताबिक, H-1B वीजा के लिए अब 1,00,000 डॉलर (करीब 88.10 लाख रुपये) की फीस देनी पड़ेगी, जो पहले 5 लाख हुआ करती थी.
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ट्रंप का कहना है कि इसका मकसद विदेशी कामगारों की बजाय अमेरिकी लोगों को नौकरी देना है. व्हाइट हाउस में आदेश पर हस्ताक्षर करते हुए ट्रंप ने कहा, “हम चाहते हैं कि हमारी नौकरियां हमारे नागरिकों को मिलें. हमें अच्छे कामगार चाहिए और यह कदम उसी दिशा में है.”
(With inputs from IANS)
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