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सदानंदन मास्टर की कहानी केवल संघर्ष की नहीं, बल्कि प्रेरणा की भी है. एक सोची समझी राजनीतिक हमले में उन्होंने अपने दोनों पैर गंवा दिये थे. अब उन्हें राष्ट्रपति ने राज्यसभा के लिए नामित किया है. आइये जानते हैं राज्यसभा के नए सांसद सदानंद मास्टर की कहानी.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए समाजसेवी सदानंदन मास्टर को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया है. उनका जीवन कभी मुश्किलों और दर्द से भरा हुआ था. 1994 में वामपंथियों के हमले में दोनों पैर गंवाने के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी. आज उनका नाम देश के सबसे सम्मानित और प्रेरणादायक व्यक्तित्वों में गिना जाता है. बाद में राजनीति में भी उनकी सक्रियता बढ़ी और बीजेपी ने उन्हें 2016 और 2021 में विधानसभा चुनावों में अपना उम्मीदवार बनाया. उनके संघर्ष और कार्यों को देखते हुए, अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें राज्यसभा के लिए नामित किया है.
25 जनवरी 1994 को सदानंद मास्टर के जीवन का वह दिन था, जब सब कुछ बदल गया. अपनी बहन की शादी का न्योता देकर घर लौटते वक्त, सीपीएम कार्यकर्ताओं के एक समूह ने उन पर हमला कर दिया. पहले तो उन्हें घसीटा गया, फिर उनके दोनों पैर काट दिए गए. उस हमले ने उन्हें शारीरिक रूप से तो तोड़ दिया, लेकिन मानसिक रूप से वह पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गए. उन्होंने फिर कृत्रिम पैर लगवाए और धीरे-धीरे चलने की कोशिश की, जिससे उनका हौसला और भी मजबूत हुआ.
सदानंदन मास्टर ने कभी भी अपनी शारीरिक विकलांगता को अपनी राह का रोड़ा नहीं बनने दिया. 1999 में उन्होंने त्रिशूर जिले के एक स्कूल में सामाजिक विज्ञान के शिक्षक के रूप में काम करना शुरू किया. 25 साल तक शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवा देने के बाद, 2020 में वह रिटायर हो गए. शिक्षक के रूप में उन्होंने न सिर्फ बच्चों को पढ़ाया, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए भी काम किया.
राज्यसभा में मनोनीत होने पर, सदानंदन मास्टर ने कहा कि यह उनके लिए गर्व की बात है और वह केरल की राजनीति में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करेंगे. उन्होंने केरल में राजनीतिक विरोधियों द्वारा किए गए अत्याचारों का भी जिक्र किया और कहा कि वह उन लोगों के आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए काम करेंगे जिन्होंने पार्टी के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदानंदन मास्टर की सराहना करते हुए कहा कि उनका जीवन साहस और दृढ़ता का प्रतीक है. पीएम मोदी ने कहा कि हिंसा और धमकियों के बावजूद, सदानंदन मास्टर का राष्ट्र के प्रति समर्पण और उनके प्रयासों ने एक नया उदाहरण पेश किया है. उन्होंने सदानंद को राज्यसभा में नामित होने पर शुभकामनाएं भी दीं.
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