भारत
उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले बहुजन समाज पार्टी (BSP) में बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला है. बसपा प्रमुख मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है.
बहुजन समाज पार्टी (BSP) की अंदरूनी गुटबाजी अब एक ऐसे मोड़ पर आ पहुंची है, जिसने यूपी की राजनीति में हड़कंप मचा दिया है. आगामी यूपी चुनावों से ठीक पहले बसपा प्रमुख मायावती ने गुरुवार (10 सितंबर) को एक बड़ा और कड़ा फैसला लेते हुए अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है. मायावती के इस अप्रत्याशित कदम से पार्टी समर्थकों और कार्यकर्ताओं के बीच खलबली मच गई है.
इस सियासी ड्रामे की शुरुआत एक दिन पहले यानी बुधवार (9 सितंबर) को हुई थी, जब मायावती ने आकाश आनंद के सामने एक शर्त रखी थी. मायावती ने कहा था कि अगर आकाश के ससुर अशोक सिद्धार्थ राजनीति से पूरी तरह संन्यास ले लेते हैं, तो वह आकाश आनंद को पार्टी में उनका पद और जिम्मेदारियां वापस लौटा देंगी.
मायावती की बात को मानते हुए अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति छोड़ने का ऐलान भी कर दिया. लेकिन इसके अगले ही दिन मायावती ने पासा पलटते हुए आकाश आनंद को भी पार्टी से बाहर करने का फरमान सुना दिया. मायावती ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट शेयर करते हुए अपनी भड़ास निकाली.
उन्होंने लिखा कि अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास लेने का जो फैसला किया है, उसमें उन्होंने बहुत देर कर दी, हालांकि फैसला सही है. मायावती के मुताबिक, अगर अशोक सिद्धार्थ यह कदम बहुत पहले उठा लेते, तो बहुजन मूवमेंट और खुद आकाश आनंद के सामने इतनी मुश्किलें खड़ी न होतीं. मायावती को चुनाव की तैयारियों के बीच संगठन में इस तरह के कड़े कदम उठाने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता.
1. आज श्री अशोक सिद्धार्थ द्वारा राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा अति-देर से उठाया गया यह सही क़दम है।
— Mayawati (@Mayawati) September 10, 2026
2. वैसे लोगों का यही कहना है कि अगर यह फैसला वे काफी पहले ही ले लेते तो बी.एस.पी., बहुजन समाज व बहुजन मूवमेन्ट तथा उनके दामाद श्री आकाश आनन्द को भी लगातार विपरीत परिस्थितियों…
मायावती ने अशोक सिद्धार्थ पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि उनके फैसले की टाइमिंग ही बताती है कि नीयत में खोट था. मायावती का कहना था कि अगर अशोक सिद्धार्थ को वाकई अपने दामाद आकाश आनंद के सुनहरे भविष्य और बहुजन मूवमेंट की चिंता होती, तो वे बिना किसी शर्त के तुरंत राजनीति छोड़ देते. देर से फैसला लेना यह साफ दिखाता है कि उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं खत्म नहीं हुई थीं.
अपने भतीजे आकाश आनंद से भारी नाराजगी जताते हुए मायावती ने लिखा कि आकाश को अपने राजनीतिक भविष्य से ज्यादा अपने ससुर की फिक्र है. मायावती ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने अशोक सिद्धार्थ के संन्यास को लेकर आधिकारिक पोस्ट किया, जो असल में आकाश के ही फायदे के लिए था, तब भी आकाश ने उसे रिपोस्ट तक करने की जहमत नहीं उठाई. इसी रवैये से नाराज होकर मायावती ने उन्हें पार्टी से बेदखल करने का कड़ा फैसला ले लिया.
ये भी पढ़ें- सऊदी अरब पर लगातार दूसरे दिन हूती हमला, ‘इस्लामिक NATO’ की अब होगी असली परीक्षा