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जज साहब... बकरे की कुर्बानी के लिए जगह दिला दीजिए, बकरीद से पहले हाईकोर्ट में गुहार, जानिए क्या है मामला

Eid Al-Adha: बकरीद पर कुर्बानी को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है. मध्य प्रदेश में एक व्यक्ति हाईकोर्ट तक पहुंच गया. हालांकि, कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी.

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जज साहब... बकरे की कुर्बानी के लिए जगह दिला दीजिए, बकरीद से पहले हाईकोर्ट में गुहार, जानिए क्या है मामला

कुर्बानी को लेकर विवाद

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देशभर में ईद उल-अज़हा यानी बकरीद (Eid Al-Adha) का त्योहार 7 जून को मनाया जाएगा. यह मुस्लिम समुदाय का सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है. इस दिन नमाज़ अदा करने के बाद मुस्लिम समुदाय के लोग अल्लाह की शान में जानवरों की कुर्बानी देते हैं. लेकिन इस कुर्बानी को लेकर कई राज्यों में विवाद शुरू हो गया है. ऐसा ही एक मामला मध्य प्रदेश के ग्वालियर से सामने आया है, जहां कुर्बानी की अनुमति नहीं मिलने पर एक शख्स हाईकोर्ट पहुंच गया.

दरअसल, विदिशा के रहने वाले भूरा शेख मियां ने बकरीद पर कुर्बानी के लिए हैदरगढ़ पंचायत से जगह मांगी थी. लेकिन पंचायत ने जगह देने से मना कर दिया. इसको लेकर उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अनुरोध किया कि बकरीद पर कुर्बानी करने के लिए पंचायत क्षेत्र में विशेष स्थान दिया जाए.

लेकिन हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि याचिकाकर्ता को सीधे-सीधे हाईकोर्ट आने का अधिकार नहीं है. उन्होंने ग्राम पंचायत के किसी निर्णय को चुनौती देने से पहले ग्राम पंचायत अधिनियम में अपलीखित धाराओं के तहत अपील करनी चाहिए. जब तक अधीनस्थ वैधानिक उपाय मौजूद हैं, ऐसे मामलों में सीधे हाईकोर्ट नहीं आना चाहिए.

बेंच ने साथ ही ग्वालियर के एसडीएम को आदेश दिया कि 6 जून तक याचिकाकर्ता की शिकायत पर विचार करें और उसका समाधान निकालें. कोर्ट का यह आदेश पंचायत स्तर पर किसी तरह का विवाद न बढ़े और स्थानीय स्तर पर समस्याओं की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.

AIMIM ने कहा- बकरीद पर ही क्यों होता है विवाद
कुर्बानी को लेकर कुछ बीजेपी नेता विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि जीव हत्या नहीं होनी चाहिए. इस पर AIMIM प्रवक्ता असमी वकार ने कहा कि बकरीद आते ही कुछ संगठनों का पशु प्रेम क्यों जाग जाता है. पूरे साल करोड़ों जानवरों को काटकर मांस दुनियाभर में भेजा जाता है और इसका व्यापार मुस्लिम नहीं बल्कि कुछ हिंदू कर रहे हैं, तब आपत्ति क्यों नहीं होती. मुसलमानों के त्योहार पर जानवरों से प्रेम क्यों याद आता है.

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