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Maharashtra News: चार महीने में 2 करोड़ का खाना खा गए सीएम एकनाथ शिंदे, जानिए विपक्ष का क्या है आरोप

Maharashtra Politics: विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजित पवार ने मुख्यमंत्री से सवाल किया है कि क्या उनकी चाय में सोने का पानी डाला जाता है.

Maharashtra News: चार महीने में 2 करोड़ का खाना खा गए सीएम एकनाथ शिंदे, जानिए विपक्ष का क्या है आरोप

Eknath Shinde Ajit Pawar

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डीएनए हिंदी: Maharashtra Budget 2023: महाराष्ट्र का बजट पेश करने से पहले मुख्यमंत्री एकनाश शिंदे (Eknath Shinde) फिजूलखर्ची के विवाद में फंस गए हैं. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में उनके सरकारी बंगले 'वर्षा' में महज 4 महीने के अंदर 2.38 करोड़ रुपये खाने-पीने पर खर्च किए जाने का दावा किया गया है. इन रिपोर्ट्स के आधार पर बजट सेशन शुरू होने से एक दिन पहले विपक्षी नेताओं ने मुख्यमंत्री पर जुबानी हमला बोलते हुए सवाल पूछे हैं. खासतौर पर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजित पवार (Ajit Pawar) ने मुख्यमंत्री से सवाल पूछा है कि क्या उनकी चाय में सोने का पानी डाला जाता है? 

सोमवार से शुरू हुआ है बजट सत्र

महाराष्ट्र विधानसभा में सोमवार से बजट सत्र शुरू हुआ है. यह सेशन 27 फरवरी से 27 मार्च तक चलेगा. इससे एक दिन पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता अजित पवार ने शिंदे पर हमला बोला. रविवार शाम को विपक्षी दलों की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में अजित पवार ने कहा, शिंदे-फडणवीस सरकार आम आदमी की समस्याओं की अनदेखी कर रही है और किसानों की उसे कोई परवाह नहीं है. महज अपने मुस्कुराते हुए चेहरे दिखाने के लिए करोड़ों रुपय खर्च किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा, हमने इसी कारण हाई-टी के निमंत्रण के बहिष्कार का फैसला लिया है. उन्होंने कहा, हम चाय पीने के बजाय महाराष्ट्र के नए राज्यपाल रमेश बैस (Ramesh Bais) से मिलकर उन्हें ये सारी चिंताएं बताएंगे.

'मैं भी रहा डिप्टी सीएम, तब तो नहीं हुआ ऐसा'

पवार ने कहा, मैं भी डिप्टी सीएम रहा हूं. मेरे करीबी सहयोगी मुख्यमंत्री रहे. मेरे या उनके शासनकाल में कभी ऐसी फिजूलखर्ची देखने को नहीं मिली. उन्होंने कहा, राज्य सरकार राहत सहायता की घोषणा तो करती है, लेकिन यह प्रभावित लोगों या योजनाओं के लाभार्थियों को मिल ही नहीं रही है. मुझे इसकी जानकारी पूरे राज्य के हालिया दौरे में मिली. उन्होंने कहा, महंगाई बढ़ने से किसानों की लागत बढ़ गई, लेकिन सरकार बाजार में कृषि उपज की अच्छी कीमत नहीं दिला पा रही है.

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