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Maharashtra Election: महाराष्ट्र में किसकी बनेगी सरकार? महायुति या MVA? नतीजों में बन सकते हैं ये 4 समीकरण

एक तरफ मैदान में महायुति की पार्टियां थीं. इनमें बीजेपी, शिवसेना-शिंदे गुट और एनसीपी-अजित पवार गुट शामिल हैं. दूसरी तरफ महाविकास आघाड़ी की पार्टियां थीं. इनमें कांग्रेस, शिवसेना-उद्धव गुट और एनसीपी-शरद पवार गुट शामिल हैं. नतीजे आने के बाद महाराष्ट्र में बन सकते हैं ये चार समीकरण. डालते हैं एक नजर.

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Maharashtra Election: महाराष्ट्र में किसकी बनेगी सरकार? महायुति या MVA? नतीजों में बन सकते हैं ये 4 समीकरण

Maharashtra Politics

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महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर वोटिंग हो चुकी है. अब लोगों की नजर चुनाव परिणाम पर टिकी हुई है.  इसके लिए लोग 23 नवंबर का इंतजार कर रहे हैं. वहीं सियासी पार्टियां और राजनीतिक जानकार चुनावी विश्लेषन में व्यस्त हैं. राज्य में चुनाव के दौरान दोनों गठबंधनों ने लोगों को अपनी ओर लुभाने की पुरजोर कोशिश की है. एक तरफ मैदान में महायुति की पार्टियां थीं. इनमें बीजेपी, शिवसेना-शिंदे गुट और एनसीपी-अजित पवार गुट पार्टियां शामिल हैं. वहीं दूसरी तरफ महाविकास आघाड़ी की पार्टियां मैदान में थीं. इनमें कांग्रेस, शिवसेना-उद्धव गुट और एनसीपी-शरद पवार गुट शामिल हैं. 


महाराष्ट्र में बन सकते हैं ये चार समीकरण
पहला समीकरण ये हो सकता है कि मौजूदा सरकार वाले गठबंधन महायुति को पूर्ण बहुमत के साथ सरकार में आए. दूसरा समीकरण ये हो सकता है कि विपक्ष में मौजूद महाविकास आघाड़ी की बहुमत हासिल हो और उनकी सरकार बने. तीसरा समीकरण त्रिशंकु विधानसभा का हो सकता है, जिसमें किसी भी गठबंधन को बहुमत हासिल न हो और छोटी पार्टियों के साथ मिलकर कोई गठबंधन सरकार बनाए. चौथा समीकरण ये हो सकता है कि विधानसभ में निर्दलीय विधायकों की संख्या में पहले से इजाफा हो और कोई भी गठबंधन तोड़-जोड़ की स्थिति में भी सरकार बनाने में नाकामयाब हो जाए. ऐसी स्थिति में राज्य में राष्ट्रपति शासन लग सकता है.

किनकी कितनी दावेदारी
महायुति की ओर से दावा किया जा चुका है कि लाडली बहन जैसे योजनाओं का चुनाव में लाभ मिला है. इसलिए उन्हें चुनाव नतीजों में इसका बड़ा फायदा होगा. वहीं, महाविकास आघाड़ी की सियासत चुनावों के बीच सहानुभूति हासिल करने की रही है, साथ ही स्थानीय मुद्दों को लेकर लाभ उठाने के प्रयास किए गए हैं. साथ ही छोटी पार्टियां भी इन दोनों गठबंधन के समकक्ष अपनी छाप छोड़ने की पूरी कोशिश की है. खासकर VBA और AIMIM ने चुनाव के दौरान अपनी सियासी ताकत दिखाने की पूरी कोशिश की है.

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