भारत
सुनवाई के दौरान एडवोकेट अपूर्व तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट के तीन फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि जहां मुआवजे के लिए कोई स्पष्ट नीति या वैधानिक व्यवस्था नहीं होती, उनमें मोटर एक्सीडेंट दावा मामलों में लागू सिद्धांतों को मुआवजा निर्धारित करने में आधार बनाया जा सकता है.
लखनऊ के अलीगंज कोचिंग सेंटर अग्निकांड के पीड़ितों को मुआवजा देने के मामले में सोमवार (14 सितंबर, 2026) को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के अलावा दूसरी घटनाओं में राज्य सरकार जो मुआवजा देती है, उसके लिए स्पष्ट नीति और मानदंड होने चाहिए. कोर्ट ने कहा कि अलग-अलग घटनाओं में अलग-अलग राशि देने से भेदभाव और मनमानी की स्थिति पैदा हो सकती है. कोर्ट ने राज्य सरकार से इस पर विचार करने को कहा है.
जस्टिस राजन राय और जस्टिस मंजीव शुक्ल की बेंच ने शिवेन्दु पांडे की ओर से दाखिल एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही है. कुछ पीड़ित परिवारों ने मुआवजा राशि को अपर्याप्त बताते हुए इसे बढ़ाने की अपील की है. पीठ ने राज्य सरकार से पूछा है कि पीड़ित परिवारों को दी गई मुआवजा राशि पर्याप्त क्यों मानी जाए और उसे बढ़ाया क्यों न जाए. कोर्ट को बताया गया कि पीड़ितों को अलग-अलग स्त्रोतों से करीब 11 से 12 लाख रुपये तक की राशि सहायता के तौर पर दी जा रही है. मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से पांच लाख रुपये, राज्य आपदा मोचन निधि से चार लाख रुपये और प्रधानमंत्री राहत कोष से दो लाख रुपये दिए जा रहे हैं. हालांकि पीड़ित परिवारों का कहना है कि कुछ परिवारों को पीएम रिलीफ फंड से मिलने वाले दो लाख रुपये अभी तक प्राप्त नहीं हुए हैं. कोर्ट ने सरकार के वकील से इस दलील का सत्यापन कराने को कहा है.
सुनवाई के दौरान एडवोकेट अपूर्व तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट के तीन फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि जहां मुआवजे के लिए कोई स्पष्ट नीति या वैधानिक व्यवस्था नहीं होती, उनमें मोटर एक्सीडेंट दावा मामलों में लागू सिद्धांतों को मुआवजा निर्धारित करने में आधार बनाया जा सकता है. कोर्ट ने राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट के फैसलों में दिए गए सिद्धांतों को ध्यान में रखने और शपथपत्र के माध्यम से यह बताने को कहा है कि अब तक पीड़ितों को कितना मुआवजा दिया जा चुका है. सुनवाई के दौरान अग्निकांड में घायल जयंत गुप्ता के मामले के बारे में भी बताया गया. जयंत गंभीर रूप से घायल हैं और उनका किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) में ट्रीटमेंट चल रहा है. जयंत के परिवार ने बताया कि हर महीने उनके इलाज में 70 हजार रुपये खर्च हो रहे हैं, जबकि अब तक उन्हें सिर्फ 50 हजार रुपये ही मुआवजे के तौर पर मिले हैं.
जयंत के मामले पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए कहा कि इस हादसे में सिर्फ बिल्डिंग के मालिक की गलती नहीं है, बल्कि संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है. कोर्ट ने कहा कि बिल्डिंग को अवैध तरीके से व्यवसायिक उपयोग में लाने की अनुमति दी गई थी. कोर्ट ने कहा कि ऐसे में कम से कम जयंत के ट्रीटमेंट बिल का भुगतान राज्य सरकार को करना चाहिए.
हाईकोर्ट ने केजीएमयू को भी निर्देश दिया कि जयंत से ट्रीटमेंट का कोई शुल्क न लिया जाए और कोई खर्च आता है तो उसे राज्य सरकार से मांगा जाए और राज्य सरकार उसका भुगतान सुनिश्चित करे. 22 जून को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में तीन मंजिल बिल्डिंग में आग लगने की वजह से 15 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई घायल हो गए थे.
यह भी पढ़ें:- कौन है कल्याण बैंसला? जिसे गुरुग्राम हिट-एंड-रन केस में किया गया गिरफ्तार, जोड़ी गई हत्या के प्रयास की धारा