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Rath Yatra: एक-दूसरे पर गिरने लगे लोग! कैसे बनी पुरी में रथ यात्रा उत्सव के दौरान भगदड़ की स्थिति, कब-कब हुए हैं ऐसे हादसे?

ओडिशा के पुरी में बृहस्पतिवार, 16 जुलाई को रथ यात्रा के दौरान अचानक भीड़ बढ़ने के कारण भगदड़ की स्थिति बन गई. इसमें व्यक्ति की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए. घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

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Rath Yatra: एक-दूसरे पर गिरने लगे लोग! कैसे बनी पुरी में रथ यात्रा उत्सव के दौरान भगदड़ की स्थिति, कब-कब हुए हैं ऐसे हादसे?

पुरी रथ यात्रा के दौरान भगदड़ जैसी स्थिति बन गई. (फोटो- ANI)

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  • रथ यात्रा उत्सव के दौरान ओडिशा के पुरी में हुआ हादसा.
  • मरीचि कुंड चौक के पास भगदड़ की स्थिति.
  • एक व्यक्ति की मौत की खबर.

ओडिशा के पुरी में रथ यात्रा उत्सव के दौरान 'ग्रैंड रोड' पर भक्तों की भारी भीड़ के कारण भगदड़ जैसी स्थिति बन गई.  शुरुआती जानकारी के अनुसार, इसमें कम से कम एक व्यक्ति की मौत की खबर है.  जैसे ही अफरा-तफरी मची, स्पेशल रेस्क्यू यूनिट (SRU) के जवान मौके पर और भक्तों को सुरक्षित बाहर निकाला. दर्जनों लोगों को अस्पताल में भी भर्ती कराया गया है. इस घटना के बाद, प्रशासन ने यात्रा के रास्ते पर सुरक्षा और भीड़ को नियंत्रित करने के इंतजाम और कड़े कर दिए हैं. 

कैसे बनी रथ यात्रा उत्सव में भगदड़ की स्थिति?

समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, पुरी में घटनास्थल पर मौजूद एक श्रद्धालु ने बताया कि मरीचि कुंड चौक के पास या तो बाहरी घेरे की रस्सी की बैरिकेड गिर गई, या कुछ लोग अपना संतुलन खो बैठे और सड़क पर गिर गए. उन्होंने बताया कि उन्होंने लगभग 40 से 50 लोगों को एक-दूसरे के ऊपर गिरते देखा, जिससे कई श्रद्धालु घायल हो गए और चार से पांच को गंभीर चोटें आई हैं. 

बता दें कि गुरुवार 16 जुलाई को पवित्र शहर पुरी में भव्य वार्षिक रथ यात्रा देखने के लिए लाखों लोग एकत्रित हुए थे. विश्व प्रसिद्ध वार्षिक रथ यात्रा उत्सव की शुरुआत निर्धारित समय से पहले ही दिन में दिव्य भाई-बहनों और अन्य देवी-देवताओं के लिए 'पहंडी बीजे' अनुष्ठान के साथ हुई. 

पारंपरिक मान्यता है कि रथों को जिस रस्सी से बांधकर खींचा जाता है उसे छूने से सारे पाप धुल जाते हैं. इसी वजह से हजारों लोग रथ के आस-पास इकट्ठा हो जाते हैं. 'पहंडी बीजे' अनुष्ठान के दौरान जब देवी-देवताओं को मंदिर से बाहर लाया जाता है और रथ पहली बार 3 किलोमीटर के रास्ते पर चलना शुरू करते हैं, तब भगदड़ मचने का खतरा सबसे ज्यादा होता है. जुलाई के महीने में ओडिशा में गर्मी और उमस भी चरम पर होती है. ऐसे मौसम में भारी भीड़ के कारण बहुत सारे लोगों को अचानक घबराहट और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है. 

रथ यात्रा के दौरान पहले कब-कब बनी है भगदड़ की स्थिति

ऐसा पहली बार नहीं है जब रथ-यात्रा के दौरान भगदड़ की स्थिति बनी हो. साल 2024 में भी रथयात्रा के दौरान 7 जुलाई को भगवान बलभद्र के रथ तालध्वज को खींचने के दौरान भगदड़ मच गई थी. इस हादसे में एक श्रद्धालु की मौत हुई थी और  400 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. 

इसी तरह साल 2025 में भी पुरी जिले में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के दौरान 29 जून को श्री गुंडिचा मंदिर के पास हुई भगदड़ में तीन श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी. इस हादसे में छह से सात लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे और करीब 50 अन्य को चोट लगी थी. 

साल 2008 में जगन्नाथ मंदिर के बाहर सालाना रथ यात्रा उत्सव के दौरान मची भगदड़ में छह लोगों की मौत हो गई थी. यह घटना सिंह द्वार के सामने तब हुई थी जब भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियों को पारंपरिक जुलूस के लिए मंदिर से बाहर लाया जा रहा था.

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