भारत
लेह हिंसा मामले में पुलिस ने पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को जिम्मेदार बताया है. उनके पाकिस्तान और बांग्लादेश संपर्कों की जांच हो रही है. वांगचुक को शुक्रवार को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में लिया गया है.
लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के आंदोलन का नेतृत्व कर रहे पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. लेह में उनकी भूख हड़ताल के दौरान हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद उन्हें गिरफ्तार कर जोधपुर जेल भेज दिया गया था. वहीं, अब लद्दाख के डीजीपी ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि सोनम वांगचुक के पाकिस्तानी संबंधों की जांच की जा रही है.
लद्दाख के डीजीपी ने बताया है कि सोनम वांगचुक को क्यों गिरफ्तार किया गया. लद्दाख के डीजीपी के मुताबिक, 24 सितंबर को हुई हिंसा में सीआरपीएफ के 17 जवान और 70 से ज़्यादा नागरिक घायल हुए थे. डीजीपी ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि एक पाकिस्तानी पीआईओ सोनम वांगचुक के संपर्क में था. उसे गिरफ्तार कर लिया गया है.
लद्दाख के पुलिस महानिदेशक एस.डी. सिंह जामवाल ने शनिवार को कहा कि पुलिस पिछले महीने सीमा पार से कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के विरोध प्रदर्शनों के वीडियो भेजने वाले एक पाकिस्तानी खुफिया एजेंट की गिरफ्तारी के सिलसिले में वांगचुक के पाकिस्तान से कथित संबंधों की जाँच कर रही है. जामवाल ने बुधवार को हुई हिंसा के लिए सोनम वांगचुक को ज़िम्मेदार ठहराया, जिसमें चार लोग मारे गए और कई अन्य घायल हो गए. वांगचुक को शुक्रवार को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया और राजस्थान के जोधपुर की एक जेल में भेज दिया गया.
जामवाल ने पत्रकारों से कहा, "वांगचुक के ख़िलाफ़ जांच में जो कुछ भी पाया गया है, उसे अभी सार्वजनिक नहीं किया जा सकता. प्रक्रिया जारी है." अगर आप उनके यूट्यूब प्रोफ़ाइल और इतिहास पर नजर डालें, तो पता चलता है कि उनके भाषण भड़काऊ रहे हैं, क्योंकि उन्होंने अरब स्प्रिंग और नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका में हाल ही में हुई अशांति का ज़िक्र किया है.
हमारी हिरासत में एक पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंट है, जो वांगचुक के नेतृत्व में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के वीडियो सीमा पार भेज रहा था." पुलिस प्रमुख ने वांगचुक की कुछ विदेश यात्राओं को संदिग्ध बताते हुए कहा, "वह पाकिस्तान में द डॉन (एक पाकिस्तानी अखबार) के एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे और बांग्लादेश भी गए थे." वांगचुक लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के नेतृत्व वाले आंदोलन के एक प्रमुख नेता हैं, जिसने लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची में एक केंद्र शासित प्रदेश को शामिल करने की मांग की थी.
जामवाल ने कहा कि वांगचुक ने आंदोलन के मंच पर कब्ज़ा करने और केंद्र सरकार व लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच चल रही बातचीत को कमज़ोर करने की कोशिश की. केंद्र सरकार ने लद्दाख के नेताओं को 6 अक्टूबर को नए दौर की बातचीत के लिए आमंत्रित किया है. जामवाल ने कहा कि वांगचुक को पता था कि दोनों पक्षों के बीच अनौपचारिक बैठक 25 सितंबर को होनी है. फिर भी उन्होंने अपना अनशन जारी रखा. जामवाल ने आरोप लगाया कि, "अनौपचारिक बैठक से ठीक एक दिन पहले, भड़काऊ वीडियो और बयानों के ज़रिए शांतिपूर्ण माहौल को बिगाड़ने की कोशिश की गई. इसी के चलते बुधवार को हिंसा हुई, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई."
बुधवार की हिंसा में विदेशी संलिप्तता संबंधी उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता के बयान पर जामवाल ने कहा कि गोलीबारी में घायल हुए तीन नेपाली नागरिकों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और कुछ अन्य विदेशी नागरिकों की संलिप्तता भी सामने आई है. उन्होंने आगे बताया कि बुधवार की हिंसा के सिलसिले में अब तक कुल 50 लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें से कम से कम छह के इसमें शामिल होने का संदेह है. डीजीपी ने कहा, "यह बिल्कुल स्पष्ट है कि इस मामले में मुख्य भड़काने वाला वांगचुक लद्दाख के बाहर एक जेल में है."
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