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Rajiv Gandhi assassination case: 'मैं आतंकी नहीं हूं', सुप्रीम कोर्ट से रिहाई मिलने पर बोलीं Nalini Sriharan

राजीव गांधी के हत्यारों को सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को रिहा करने के आदेश दिए हैं, जिनमें नलिनी श्रीहरन भी शामिल हैं.

Rajiv Gandhi assassination case: 'मैं आतंकी नहीं हूं', सुप्रीम कोर्ट से रिहाई मिलने पर बोलीं Nalini Sriharan
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डीएनए हिंदी: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने शुक्रवार को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी हत्याकांड (Rajiv Gandhi assassination case) के छह दोषियों को जेल से रिहा करने का आदेश दिया. इस फैसले के बाद इन 6 दोषियों में से एक नलिनी श्रीहरन (Nalini Sriharan) ने कहा, मैं जानती हूं कि मैं आतंकी नहीं हूं. नलिनी ही वह दोषी थी, जो लंबे समय से जेल में रहकर खुद को इस मामले में निर्दोष बताते हुए रिहाई के लिए गुहार लगा रही थीं. नलिनी की गुहार पर ही राजीव गांधी की पत्नी व पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने उसकी फांसी की सजा को बदलवाकर उम्र कैद में तब्दील कराया था.

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32 साल किया मैंने संघर्ष

News18 को दिए इंटरव्यू में नलिनी ने कहा, मैंने जेल में कई साल तक दुख उठाया है. मेरे लिए पिछले 32 साल संघर्ष से भरे रहे हैं. मैं उन सभी को धन्यवाद देती हूं, जिन्होंने मेरा समर्थन किया है. मैं तमिलनाडु के लोगों और सभी वकीलों का अपने ऊपर यकीन दिखाने के लिए शुक्रिया अदा करती हूं.

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सोनिया-प्रियंका ने कर दिया था नलिनी को माफ

देश में लोकसभा चुनावों के प्रचार के दौरान 21 मई, 1991 को राजीव गांधी तमिलनाडु (Tamil Nadu) के श्रीपेरूमबुदूर (Sriperumbudur) में एक रैली में पहुंचे थे. इसी दौरान श्रीलंकाई विद्रोही संगठन लिट्टे (LTTE) की एक महिला आत्मघाती हमलावर ने बम विस्फोट कर दिया था, जिसमें राजीव की भी मौत हो गई थी. इस हत्या में शामिल रहने के लिए 7 लोगों को फांसी की सजा दी गई थी, जिनमें नलिनी श्रीहरन भी शामिल थी. 

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नलिनी ने खुद को निर्दोष बताते हुए गुहार लगाई थी. इस पर साल 2000 में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने हस्तक्षेप करते हुए उसकी फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलवा दिया था. साल 2008 में राजीव की बेटी प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra) ने भी उससे जेल में मुलाकात की थी. सोनिया और प्रियंका कहती रही हैं कि उन्होंने नलिनी को माफ कर दिया है. हालांकि विपक्षी दल इसे कांग्रेस की दोबारा तमिलनाडु में पैठ बनाने की कवायद कहकर आलोचना करते रहे हैं.

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