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मनोज कुमार खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष बने, भविष्य के लिए बताया ये प्लान

मनोज कुमार पहले भी KVIC में पहले भी काम कर चुके हैं. अब वह खादी को ग्लोबल लेवल पर ले जाने की कोशिशों में जुटे हैं.

मनोज कुमार खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष बने, भविष्य के लिए बताया ये प्लान

खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) के नए अध्यक्ष मनोज कुमार.

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डीएनए हिंदी: खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) के नए अध्यक्ष मनोज कुमार (Manoj Kumar) ने 15 जुलाई, 2022 (शुक्रवार) को पदभार ग्रहण कर दिया है. उन्होंने पद संभालने के बाद कहा कि उनकी प्राथमिकता नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को पूरा करना है.

मनोज कुमार ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने कहा है कि जमीनी स्तर पर अधिक से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम इकाइयों की स्थापना करके KVIC की अलग-अलग योजनाओं के जरिए देश में अतिरिक्त रोजगार के साथ-साथ स्वावलंबी भारत के निर्माण में अहम योगदान देना है.

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युवाओं के लिए क्या है प्लान?

मनोज कुमार ने कहा कि KVIC प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन पर काम करेगा जिसके तहत हमारे युवा नौकरी तलाशने वाले नहीं बल्कि नौकरी देने वाले बनेंगे. मनोज कुमार KVIC में विशेषज्ञ सदस्य व्यापार (मार्केटिंग) के रूप में काम कर चुके मनोज कुमार के पास व्यापार और ग्रामीण विकास का व्यापक अनुभव है. उन्होंने कहा कि देश में खादी की ‘एक मौन क्रांति’ चल रही है, जिसके नायक नरेंद्र मोदी हैं. पिछले 8 साल में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में ‘खादी इंडिया’ ने जो लक्ष्य हासिल किए हैं वो अद्भुत है. 

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कारीगरों तक लाभ पहुंचाने पर जोर

मनोज कुमार के मुताबिक उनका प्रयास होगा कि KVIC के साथ जुड़े ज्यादा से ज्यादा 'कारीगरों के हाथों में पैसा पहुंचे' जिससे उनके आय के स्रोत बढ़ें, जिससे समाज के अंतिम पायदान पर खड़े कारीगरों का आर्थिक विकास हो और उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सके. आयोग का प्रयास होगा कि ‘हर हाथ को काम और काम का उचित दाम’ मिले.

खादी को देंगे नई ऊंचाई

मनोज कुमार ने कहा है कि वह पीएम मोदी के सबका साथ, सबका विकास और खादी फॉर नेशन, खादी फॉर फैशन और खादी फॉर ट्रांस्फार्मेशन के मूलमंत्र पर खादी इंडिया को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने का प्रयास करेंगे. जिस तरह से खादी पिछले कुछ वर्षों में भारत में फिर से लोकप्रिय हुई है उसी तरह से इसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना उनकी प्राथमिकता होगी. उनका प्रयास होगा कि खादी लोकल से ‘KHADI GLOBAL’ हो जाए और पूरी दुनिया में भारत के स्वदेशी उत्पादों की मांग बढ़े.

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