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कोलकाता के साउथ कलकत्ता लॉ कॉलेज में एक 24 वर्षीय छात्रा के साथ हुए कथित सामूहिक बलात्कार मामले में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. ताजा गिरफ्तारी कॉलेज के 55 वर्षीय सुरक्षा गार्ड की हुई है, जिस पर आरोप है कि उसने अपराध को होते देखा लेकिन कुछ नहीं किया.
15 जून को हुई इस घटना में पीड़िता ने शिकायत दर्ज कराई कि उसे कॉलेज के ही छात्र संघ कार्यालय के पास स्थित सुरक्षा गार्ड के कमरे में फुसलाकर बंद किया गय.वहां पूर्व छात्र और अब वकील मोनोजीत मिश्रा (31) ने कथित रूप से उसके साथ बलात्कार किया, जबकि दो अन्य छात्र जैब अहमद (19) और प्रमित मुखोपाध्याय (20) ने मदद की. पीड़िता ने बयान में हॉकी स्टिक से वार, इनहेलर के लिए भीख मांगना, और जान से मारने की धमकियों का भी उल्लेख किया है. मेडिकल रिपोर्ट में यौन उत्पीड़न की पुष्टि हुई है.
घटना के बाद कोलकाता पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की और अब तक चार लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें कॉलेज का सुरक्षा गार्ड पिनाकी बनर्जी भी शामिल है. पीड़िता के अनुसार, गार्ड को धमकाकर बाहर भेजा गया ताकि अपराध को अंजाम दिया जा सके. आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच की जा रही है ताकि यह पता चल सके कि घटना का कोई वीडियो रिकॉर्ड किया गया था या नहीं.
तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा "अगर दोस्त दोस्त का बलात्कार करे तो क्या किया जा सकता है?" बनर्जी ने राजनीतिक बवाल खड़ा कर दिया है. उन्होंने यह भी कहा कि "महिलाओं को विकृत मानसिकता वाले पुरुषों से लड़ना चाहिए", और पत्रकारों पर "राजनीतिक एजेंडा" चलाने का आरोप लगाया. विपक्षी भाजपा ने इसे “अपमानजनक” और “महिलाओं की सुरक्षा के प्रति असंवेदनशीलता” करार दिया.
भाजपा ने मुख्य आरोपी मिश्रा की टीएमसी नेताओं के साथ तस्वीरें साझा कर आरोप लगाया कि पार्टी ने अपराधियों को संरक्षण दिया. विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया. जवाब में, महिला एवं बाल विकास मंत्री शशि पांजा ने कहा कि “हम महिला के दर्द का राजनीतिकरण नहीं करना चाहते” और आश्वासन दिया कि “किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा”.
टीएमसीपी अध्यक्ष त्रिनकुर भट्टाचार्य ने मिश्रा से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि वह 2019 में छात्र संगठन में था और अब कोई पद नहीं रखता. उन्होंने कहा कि “वह बलात्कारी है, और उसे न्याय का सामना करना चाहिए, चाहे वह किसी भी पार्टी से हो.”
पीड़िता ने साहस जुटाकर शिकायत दर्ज कराई और न्याय की मांग की. उनका कहना है कि "मैं एक कानून की छात्रा हूं और अब पीड़िता हूं. मुझे न्याय चाहिए."