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केरल में सरकारी प्राइमरी स्कूल शिक्षक (LPST) पद के लिए परीक्षा पास कर चुके अभ्यर्थी अपनी नियुक्ति की मांग को लेकर पिछले 35 दिनों से केरल सचिवालय के बाहर धरने पर बैठे हैं.
केरल से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है. राज्य की राजधानी तिरुवनंतपुरम में सचिवालय के बाहर युवा सड़कों पर घास खाने को मजबूर हैं. ये कोई मामूली प्रदर्शनकारी नहीं, बल्कि सरकारी प्राइमरी स्कूलों में शिक्षक बनने की योग्यता पूरी कर चुके युवा हैं.
लगभग 35 दिनों से जारी इस अनोखे प्रदर्शन का मकसद सरकार की नींद खोलना और अपनी नियुक्ति की मांग करना है. ज़ी न्यूज ने केरल के युवा शिक्षकों के इस मुद्दे और उनके विरोध प्रदर्शन को लगातार प्रमुखता से उठाया है. चैनल ने नौकरी और जॉइनिंग लेटर की मांग कर रहे इन अध्यापकों की आवाज को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का काम किया है.
मामला केरल लोक सेवा आयोग की लोअर प्राइमरी स्कूल टीचर (LPST) भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है. ये वो अभ्यर्थी हैं जिन्होंने परीक्षा पास की, हर चरण को पार किया और मेरिट लिस्ट में अपना नाम दर्ज कराया. इसके बावजूद महीनों से इन्हें केवल आश्वासन मिल रहा है, हाथ में जॉइनिंग लेटर नहीं. प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि वे हर संभव शांतिपूर्ण रास्ता अपना चुके हैं, लेकिन राज्य सरकार की तरफ से कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया जा रहा.
एक अभ्यर्थी ने कहा, "हम पिछले एक महीने से भी ज्यादा समय से सड़कों पर बैठे हैं. सरकार हमसे दो महीने का समय मांग रही है, लेकिन हमें समझ नहीं आ रहा कि जब पूरी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है तो इतना वक्त क्यों चाहिए? ऐसा लग रहा है जैसे सरकार हमारी जायज मांगों को नजरअंदाज कर रही है."
सोशल मीडिया और सरकार का ध्यान खींचने के लिए इन युवाओं ने शनिवार (8 अगस्त 2026) को सांकेतिक रूप से घास खाकर अपना विरोध जताया, ताकि यह संदेश दिया जा सके कि सिस्टम की अनदेखी के कारण वे भुखमरी के कगार पर पहुंच चुके हैं.
केरल में केवल नियुक्ति में देरी ही अकेली समस्या नहीं है. स्टेट प्लानिंग बोर्ड के उच्च पदों के लिए हुई पीएससी परीक्षा में मूल्यांकन की गड़बड़ियों और धांधली के बड़े आरोप लगे हैं. इससे युवाओं का गुस्सा और भड़क गया है. देश के अन्य राज्यों, जैसे झारखंड में JSSC और JPSC की गड़बड़ियों को लेकर जिस तरह जंतर-मंतर जैसा लंबा विरोध प्रदर्शन चल रहा है, कुछ वैसी ही स्थिति अब केरल में भी बनती दिख रही है.
बढ़ते जनाक्रोश और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए केरल सरकार के गृह विभाग ने मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी है. इसके लिए एक विशेष जांच टीम का गठन किया गया है, जिसकी कमान आर्थिक अपराध शाखा की आईजी पुलिस एस. अजीथा बेगम को दी गई है.
हालांकि, सरकारी आश्वासनों और एसआईटी के गठन से अभ्यर्थी और छात्र बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं. उनका कहना है कि जांच प्रक्रिया में समय गंवाने के बजाय सरकार को योग्य उम्मीदवारों को तुरंत नियुक्ति पत्र देने चाहिए. जो युवा अपनी प्रतिभा के बल पर स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने का सपना देख रहे थे, वे आज अपने हक के लिए सड़कों पर बैठने को मजबूर हैं.
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