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Crime News: 'मासूम की चीख' ने खोली बाल विवाह की काली सच्चाई, कर्नाटक की ये घटना देख सन्न रह गया समाज

कर्नाटक के होसुर में 14 वर्षीय लड़की को जबरन विवाह के लिए ले जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. पुलिस ने पॉक्सो और बाल विवाह अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है.

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Crime News: 'मासूम की चीख' ने खोली बाल विवाह की काली सच्चाई, कर्नाटक की ये घटना देख सन्न रह गया समाज
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कर्नाटक के होसुर में एक 14 वर्षीय नाबालिग लड़की को जबरन विवाह के लिए ले जाने का मामला सामने आया है. लड़की की चीख-पुकार का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें लोग मूकदर्शक बने रहे. घटना ने समाज में गहरे तक फैली बाल विवाह की कुप्रथा की ओर ध्यान आकर्षित किया है. पुलिस ने लड़की के माता-पिता समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस ने पॉक्सो और बाल विवाह अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है. 

कैसे सामने आया मामला
थिम्मथूर गांव की एक नाबालिग लड़की का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें एक आदमी उसे जबरन गोद में उठाकर ले जा रहा था और लड़की की चीखें गूंज रही थीं. हैरानी की बात ये थी कि अन्य लोग यह सब देखते रहे लेकिन किसी ने विरोध नहीं किया.  लड़की ने सातवीं तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद घर पर रहना शुरू कर दिया था, जो ग्रामीण इलाकों में आम प्रथा है. 3 मार्च को लड़की की शादी 29 वर्षीय मजदूर मदेश से जबरन कर दी गई. शादी बेंगलुरु में हुई, लेकिन लड़की ने शुरुआत से ही इस विवाह का विरोध किया.

जबरन ले जाने की वारदात
शादी के बाद लड़की ने ससुराल जाने से इनकार कर दिया. जब उसने परिवार और रिश्तेदारों से शिकायत की, तो उसकी आवाज को दबा दिया गया. 29 वर्षीय मदेश और उसके भाई मलेश  ने लड़की को जबरन उसके रिश्तेदार के घर से उठाकर कलिकुट्टई गांव ले जाने की कोशिश की. इस पूरी घटना को राहगीरों ने रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर डाल दिया. 

पुलिस का एक्शन
वीडियो वायरल होने के बाद डेनकनीकोट्टई ऑल वुमन पुलिस स्टेशन में लड़की की दादी की शिकायत पर मामला दर्ज हुआ. पुलिस ने मदेश और उसके भाई मलेश, लड़की की मां नागम्मा और उसके पिता को गिरफ्तार कर लिया. 


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कानूनी शिकंजा
सभी आरोपियों पर POCSO एक्ट और बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है. दोषियों को दो साल की जेल और एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. कर्नाटक में 2023-2024 के दौरान 180 बाल विवाह के मामले सामने आए, जिनमें से 105 को समय रहते रोका गया. बावजूद इसके, बाल विवाह की कुप्रथा राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में अब भी जारी है. 

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