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पहले जांच को गुमराह किया, वो 3 सच भी छुपाए जिन्हें अब सुरक्षा एजेंसियों ने पकड़ा... आखिर क्या था ज्योति का मकसद?

इस समय ज्योति मल्होत्रा से हरियाणा पुलिस, आईबी और एनआईए की टीम ज्योति मल्होत्रा से लगातार पूछताछ कर रही है. आइए हम आपको वो तीन सच बताने जा रहे है जो ज्योति ने जांच के दौरान छिपाए थे.

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पहले जांच को गुमराह किया, वो 3 सच भी छुपाए जिन्हें अब सुरक्षा एजेंसियों ने पकड़ा... आखिर क्या था ज्योति का मकसद?

Jyoti Malhotra

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हरियाणा पुलिस, आईबी और एनआईए की टीम ज्योति मल्होत्रा से लगातार पूछताछ कर रही है. जब से ज्योति मल्होत्रा देश की सुरक्षा एजेंशियों के रडार पर आई है तब से ही वह कुछ-कुछ छिपाने का प्रयास कर रही है. पूछताछ में भी ज्योति ने खुलकर कुछ नहीं बताया, हांलाकि उसके बयान से ये पता चला गया है कि ज्योंति कहीं न कहीं पाकिस्तान को भारत की सुरक्षा से जुड़ी जानकारी शेयर कर रही थी. जांच एजेंसियों का दावा है कि ज्योति ने पूछताछ के दौरान न केवल सहयोग नहीं किया, बल्कि लगातार झूठ बोला और जांच को गुमराह करने की कोशिश भी की.

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने की जांच
ज्योति ने तीन ऐसे सच है जो कि भारतीय सुरक्षा एजेंशियों से छुपाए हैं. पहला सच ये है कि जब ज्योति से पूछा गया कि क्या उनका संबंध पाकिस्तानी उच्चायोग के अधिकारी दानिश से हैं तो उन्होंने इसे मानने से इनकार कर दिया. दूसरा सच ये है कि जांच एजेंसी ने जब ज्योति से पूछा कि क्या आपने दो बार दानिश और अपनी बीच हुई चैटिंग को डिलीट किया है, तो ज्योति इस बात से भी मुकर गई और उन्होंने कहा कि हमारे बीच केवल साधारण बातें होती थी लेकिन बाद में डिजिटल डिवाइसेज की फॉरेंसिक जांच से पता चला कि दोनों के बीच नियमित और प्राइवेट किस्म की बातचीत होती रही थी. 

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तीसरा सच छुपाया
ज्योति ने ISI अधिकारी अली हसन से संपर्क से भी इनकार कर दिया. बाद में डिवाइस से मिले डेटा और कॉल रिकॉर्ड ने उसकी बात को गलत साबित कर दिया. जांच एजेंसी के सूत्रों के अनुसार ज्योति ने व्हाट्सएप, टेलीग्राम और एक एन्क्रिप्टेड एप्लीकेशन का इस्तेमाल किया, जिसके जरिए वह पाकिस्तान के एजेंट्स से संपर्क में थी. एन्क्रिप्टेड एप्लीकेशन का मतलब होता है कि एक ऐसी तकनीक जिससे भेजा गया मैसेज कोड वर्ड में तब्दील हो जाता है. इसका मकसद था . सबूत ना छोड़ा जाए. हालांकि, कुछ डेटा पुलिस की तकनीकी टीम ने रिकवर कर लिया है. 

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