भारत
पाकिस्तानी जासूस होने के आरोप में गिरफ्तार हुई ज्योति मल्होत्रा से पहले भी भारत को धोखा मिल चुका है. 15 साल पहले माधुरी गुप्ता नाम की महिला ने अपने देश के साथ विश्वासघात किया था.
पाकिस्तान के साथ संपर्क में रहकर जासूसी करने के आरोप में यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा की गिरफ्तारी से बहुत पहले , भारत ने इसी तरह का विश्वासघात देखा था. पंद्रह साल पहले, सिस्टम के भीतर से एक और महिला चौंकाने वाले जासूसी कांड के केंद्र में पकड़ी गई थी. इस्लामाबाद में तैनात एक मध्यम स्तर की राजनयिक माधुरी गुप्ता पर पाकिस्तान की कुख्यात इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) के साथ संपर्क में होने की बात सामने आई थी. ये 2010 की शुरुआत थी, 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के बमुश्किल डेढ़ साल बाद, जब इस्लामाबाद में भारत के उच्चायोग में एक जासूस की खबर तत्कालीन खुफिया ब्यूरो प्रमुख राजीव माथुर तक पहुंची. आंतरिक अलर्ट में जो नाम सामने आया वह माधुरी गुप्ता का था, जो ग्रेड बी भारतीय विदेश सेवा अधिकारी और इस्लामाबाद में द्वितीय सचिव थीं.
उर्दू में अपनी विद्वता और सूफीवाद तथा कविता में गहरी रुचि के लिए जानी जाने वाली गुप्ता की प्रोफ़ाइल किसी डबल एजेंट से बिलकुल मेल नहीं खाती थी. लेकिन लीक की गई जानकारी कुछ और ही कहानी बयां करती थीं. जब प्रारंभिक खुफिया सूचनाओं से गुप्ता की संदिग्ध गतिविधियों का संकेत मिला तो राजीव माथुर ने रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के प्रमुख केसी वर्मा और गृह सचिव जीके पिल्लई को इसकी जानकारी दी.चिंताओं के बावजूद, निगरानी को दो और सप्ताह तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया. इस अवधि के दौरान, कथित तौर पर उसे प्लांटेड जानकारी दी गई, जो लीक होने पर उसके पास वापस आ गई.
गुप्ता को इस बात की जानकारी नहीं थी कि उनका जाल बिछा हुआ है, इसलिए उन्हें उसी साल बाद में भूटान में होने वाले सार्क सम्मेलन के लिए मीडिया से जुड़े मामलों में मदद करने के बहाने दिल्ली बुलाया गया. वे 21 अप्रैल 2010 को राष्ट्रीय राजधानी पहुंचीं, रात पश्चिमी दिल्ली स्थित अपने आवास पर बिताई और अगली सुबह विदेश मंत्रालय के कार्यालय में रिपोर्ट की. वहां, साउथ ब्लॉक में, दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ को पहले से ही सूचना मिल गई थी और उसे बुलाया गया. कुछ ही मिनटों में, भारतीय विदेश सेवा के ग्रेड बी अधिकारी गुप्ता को पाकिस्तान की आईएसआई को वर्गीकृत रक्षा सूचनाएं लीक करने के आरोप में हिरासत में ले लिया गया.
ये भी पढ़ें-जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में सुरक्षा बलों और आतंकियों की मुठभेड़, 3-4 आतंकियों के घिरे होने की खबर
उसे 22 अप्रैल, 2010 को आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था. जांचकर्ताओं ने कहा कि उसने पाकिस्तान में तैनात भारतीय खुफिया अधिकारियों की पोल खोल दी थी. जांच में पता चला कि गुप्ता हनीट्रैप का शिकार हुई थी. वह युवक जमशेद उर्फ जिम था, जो 30 वर्ष का एक पाकिस्तानी जासूस था, जो उसकी उम्र का आधा था, जिसे गुप्ता को बहकाने और संवेदनशील जानकारी निकालने का काम सौंपा गया था. एक अन्य हैंडलर, मुदस्सर रजा राणा, जो तत्कालीन पाकिस्तान के गृह मंत्री रहमान मलिक का बैचमेट था, उसने इस ऑपरेशन को समन्वित किया. उन्होंने सबसे पहले एक महिला पत्रकार के माध्यम से उससे संपर्क किया और आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मौलाना मसूद अजहर की एक दुर्लभ किताब खोजने में उसकी मदद करके उसका विश्वास जीता.
माधुरी गुप्ता पर पहली बार 2012 में आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम की धारा 3 और 5 के तहत आरोप लगाया गया था, जिसके लिए अधिकतम 14 साल की सजा का प्रावधान था. शुरुआत में, जमानत मिलने से पहले उन्होंने 21 महीने तिहाड़ जेल में बिताए.
2018 में, शहर की एक अदालत ने उसे दोषी पाया और अंत में पाकिस्तान के लिए जासूसी करने का दोषी ठहराया पाया गया. वह राजस्थान के भिवाड़ी में रहती थी. अक्टूबर 2021 में 64 वर्ष की आयु में उसकी मृत्यु हो गई. उसकी मृत्यु के समय सजा के खिलाफ उसकी अपील दिल्ली उच्च न्यायालय में लंबित थी.
अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए हमारे गूगल, फेसबुक, x, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और वॉट्सऐप कम्युनिटी से जुड़ें.