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कैश स्कैंडल मामले में जस्टिस यशवंत वर्मा पर महाभियोग की तैयारी, 208 सांसदों ने प्रस्ताव पर किया हस्ताक्षर

Who is Justice Yashwant Verma: जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया जाएगा और इस प्रस्ताव पर 208 सांसदों के हस्ताक्षर हो चुके हैं. उन्हें हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया शुरू हो गई है.

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कैश स्कैंडल मामले में जस्टिस यशवंत वर्मा पर महाभियोग की तैयारी, 208 सांसदों ने प्रस्ताव पर किया हस्ताक्षर

जस्टिस यशवंत वर्मा पर महाभियोग की तैयारी

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Big Financial Scam Against Judge Exposed: देश की न्यायपालिका में कुछ दिन पहले एक चौंकाने वाली घटना घटी. दिल्ली उच्च न्यायालय के तत्कालीन न्यायाधीश यशवंत वर्मा के सरकारी आवास से करोड़ों रुपये की नकदी जब्त की गई. इसके बाद, उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया जाएगा और इस प्रस्ताव पर 208 सांसदों के हस्ताक्षर हो चुके हैं. उन्हें हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया शुरू हो गई है.

208 सांसदों ने महाभियोग प्रस्ताव का समर्थन किया

न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ लोकसभा और राज्यसभा में अलग-अलग महाभियोग प्रस्ताव पेश किए गए हैं. विपक्ष के नेता राहुल गांधी, भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद, अनुराग ठाकुर और विभिन्न दलों के सांसदों सहित 145 सांसदों द्वारा हस्ताक्षरित यह प्रस्ताव लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष प्रस्तुत किया गया.

63 सांसदों द्वारा हस्ताक्षरित एक प्रस्ताव राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ को सौंपा गया है. इस प्रस्ताव के लिए लोकसभा में कम से कम 100 और राज्यसभा में कम से कम 50 सांसदों की सहमति आवश्यक है. यह दोनों सदनों में सहमति की आवश्यक संख्या से कहीं अधिक है.

अनुच्छेद 124, 217 और 218 के तहत कार्यवाही शुरू कर दी गई है

न्यायाधीशों को हटाने की प्रक्रिया भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124, 217 और 218 में वर्णित है. महाभियोग प्रस्ताव स्वीकार करना या न करना पूरी तरह से लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति के निर्णय पर निर्भर करता है. प्रस्ताव स्वीकार होने के बाद, एक उच्च-स्तरीय जाँच समिति गठित की जाती है.
 
इस समिति में सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश शामिल होते हैं. यह समिति जाँच करके दो से तीन महीने के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करती है. यदि इस रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि हो जाती है, तो संसद में प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाता है और दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से अनुमोदन के बाद इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है. राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद संबंधित न्यायाधीश को पद से हटा दिया जाता है.

होली की रात आग लगने से 'नकदी कांड' उजागर

घटना 14 मार्च, 2025 की है. होली की रात 11.35 बजे जस्टिस यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास में अचानक आग लग गई. वर्मा उस समय दिल्ली से बाहर थे. उनके परिवार द्वारा दमकल विभाग को सूचना दिए जाने के बाद, पुलिस और दमकल विभाग तुरंत मौके पर पहुँच गए.

आग पर काबू पाने के दौरान, एक कमरे में नोटों का एक बड़ा बंडल मिला. पूरा कमरा नकदी से भरा हुआ था. इस पैसे की गिनती और जाँच शुरू हुई और इससे यह संदेह पैदा हुआ कि यह एक बड़ी वित्तीय धोखाधड़ी है. मामले की जाँच के लिए एक आंतरिक समिति का गठन किया गया. इस समिति द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में कहा गया कि बरामद नकदी न्यायमूर्ति वर्मा और उनके परिवार की थी और उन्होंने इसका स्रोत नहीं बताया. इसीलिए समिति ने उनके खिलाफ महाभियोग चलाने की सिफारिश की.

इस बीच, इस प्रस्ताव की पृष्ठभूमि में, जस्टिस वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर जाँच रिपोर्ट की वैधता पर ही सवाल उठा दिया है. याचिका में कहा गया है कि जिस स्टोररूम से पैसा मिला, उस पर उनका कोई सीधा नियंत्रण नहीं था. इस पूरे मामले के बाद, केंद्र सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए जस्टिस वर्मा का दिल्ली हाईकोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट तबादला कर दिया है.

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