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झारखंड में छात्रों के भारी दबाव और राहुल गांधी के पत्र के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने JPSC और JSSC CGL समेत सभी विवादित परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने का ऐलान कर दिया है.
झारखंड में सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं को लेकर हफ्तों से चल रहा छात्रों का आंदोलन आखिरकार रंग लाया है. छात्रों के भारी विरोध और 24 दिनों के लंबे आंदोलन के बाद सोमवार (17 अगस्त 2026) को हेमंत सोरेन सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए राज्य में आयोजित हुई सभी सरकारी भर्तियों और परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा कर दी है.
इसमें झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC CGL) जैसी प्रमुख परीक्षाएं भी शामिल हैं. सरकार ने यह फैसला तब लिया जब छात्रों का प्रदर्शन लगातार उग्र होता जा रहा था और इस मसले पर सियासत भी काफी गरमा गई थी. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने देर शाम इस बात की जानकारी दी कि 2014 से लेकर अब तक जितनी भी परीक्षाओं में गड़बड़ी या धांधली की शिकायतें मिली हैं, उन सभी की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी.
इस पूरे मामले की जांच का जिम्मा सीआईडी को सौंपा गया है. इसके अलावा, राज्य की परीक्षा प्रणाली में सुधार लाने और भविष्य में किसी भी तरह के पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक विशेष सुधार समिति बनाने का फैसला किया गया है.
परीक्षाओं का काम देखने वाली विवादित एजेंसी टीडीपीएल की प्रक्रिया और उसके तहत चुने गए सभी उम्मीदवारों के परिणाम भी पूरी तरह से रद्द कर दिए गए हैं. सरकार के इस बड़े फैसले के बाद महीनों से अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने रांची के सदर अस्पताल में अपना अनशन समाप्त कर दिया.
अस्पताल पहुंचे मंत्रियों और विधायकों से मुलाकात के बाद महतो ने अपना अनशन तोड़ा. उन्होंने सरकार के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में वे सरकार का पूरा सहयोग करेंगे. हालांकि, उनका कहना है कि छात्रों को एक ऐसा पुख्ता और पारदर्शी सिस्टम चाहिए, जहां कभी दोबारा पेपर लीक की नौबत न आए और युवाओं का भविष्य सुरक्षित रह सके.
दूसरी तरफ, सरकार की इन तमाम घोषणाओं के बावजूद सभी छात्र पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं. छात्र नेता रवींद्र पासवान ने साफ शब्दों में कहा है कि उनका यह आंदोलन तब तक पूरी तरह खत्म नहीं होगा, जब तक कि पूरी परीक्षा प्रणाली की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई को नहीं सौंप दी जाती.
छात्रों का मानना है कि केवल सीआईडी जांच से बड़े दोषियों तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है, इसलिए पूरे मामले की दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए सीबीआई जांच ही एकमात्र रास्ता है. ऐसे में परीक्षाओं के रद्द होने के बाद भी कई छात्र अपनी मांगों को लेकर अभी भी डटे हुए हैं.
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे कांग्रेस नेता राहुल गांधी की उस चिट्ठी का भी बड़ा असर माना जा रहा है, जो उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखी थी. राहुल गांधी ने अपने पत्र में छात्रों की मांगों को पूरी तरह जायज ठहराया था और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे युवाओं से मिलकर उनकी बात सुनने की सलाह दी थी.
इससे पहले आंदोलनकारी छात्रों ने राहुल गांधी से अपील की थी कि अगर मुख्यमंत्री उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देते, तो कांग्रेस को इस गठबंधन सरकार से अपना समर्थन वापस ले लेना चाहिए. बहरहाल, सोरेन सरकार ने परीक्षाएं रद्द करके और 2014 से अब तक की धांधलियों की जांच के आदेश देकर छात्रों के सामने एक कदम तो बढ़ाया है, लेकिन सीबीआई जांच की मांग पर अड़े छात्रों का आंदोलन पूरी तरह थमा नहीं है.
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