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Jharkhand News: झारखंड में बीजेपी करने जा रही है बड़ा बदलाव, इस दिग्गज चेहरे की होगी राजनीति में वापसी 

Jharkhand News: झारखंड विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद बीजेपी शीर्ष नेतृत्व बड़े बदलाव की तैयारी में है. पूर्व सीएम रघुबर दास का राजनीतिक वनवास जल्द खत्म हो सकता है. 

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Jharkhand News: झारखंड में बीजेपी करने जा रही है बड़ा बदलाव, इस दिग्गज चेहरे की होगी राजनीति में वापसी 

झारखंड बीजेपी में हो सकते हैं बड़े बदलाव 

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झारखंड विधानसभा चुनाव में बीजेपी (BJP) को सत्ता में वापसी की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा हो नहीं सका है. बीजेपी हाई कमान अब पार्टी में बड़े बदलाव करने के लिए तैयारी में जुटी है. खबर है कि पूर्व सीएम रघुबर दास का राजनीतिक वनवास खत्म हो सकता है. दास को जब अचानक ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किया गया था, तो कयास लगाए जा रहे थे कि उनकी सक्रिय राजनीति का दौर खत्म हो गया है. हालांकि, अब अचानक ही उनकी बीजेपी में फिर से एंट्री कराई गई है. इसके बाद माना जा रहा है कि पार्टी ओबीसी और एसटी समुदाय के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कुछ नए और कुछ पुराने चेहरों पर भरोसा जता सकती है. 

राजनीतिक वनवास का दौर होगा खत्म 

रघुबर दास को जब बीजेपी ने झारखंड का मुख्यमंत्री बनाया था, तब भी स्थानीय नेताओं में इसे लेकर आक्रोश था. किसी गैर-आदिवासी को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने का फैसला बहुत से नेताओं को पसंद नहीं आया था. इसके बाद 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी को करारी हार मिली और खुद रघुबर अपनी सीट तक हार गए थे. 18 अक्टूबर 2023 को उन्हें ओडिशा का राज्यपाल बनाया गया और इस फैसले से अटकलें लगाई जा रही थी कि अब सक्रिय राजनीति में उनका सफर खत्म हो गया है. हालांकि अब फिर से उनकी प्रदेश की राजनीति में वापसी हुई है और जल्द ही उन्हें पार्टी अध्यक्ष भी बनाया जा सकता है. दास को अध्यक्ष का पद देकर बीजेपी एक साथ ओबीसी और एसटी वोट बैंक को साधना चाहती है. 

बाबूलाल मरांडी का राजनीतिक भविष्य क्या होगा

बीजेपी ने बाबूलाल मरांडी को सदन में पार्टी का नेता बनाया है. प्रदेश के राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि 2024 विधानसभा चुनाव में मिली हार को पार्टी ने बड़े सबक के तौर पर लिया है. अब पार्टी और संगठन के अंदर गुटबाजी को रोकने और प्रदेश के सभी वर्गों को अपने साथ जोड़ने के लिए शीर्ष नेतृत्व फूंक-फूंककर कदम रख रही है. रघुबर दास को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के लिए ही मरांडी को विधायक दल का नेता चुना गया है. मुख्य सचेतक की भूमिका के लिए किसी सवर्ण नेता को चुना जा सकता है. विधानसभा चुनाव में मिली हार के बावजूद भी बाबूलाल मरांडी को पार्टी प्रमुख आदिवासी चेहरे के तौर पर सम्मान देना चाहती है. 

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