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झांसी : एक से दूसरे अस्पताल में नवजात बच्ची को डॉक्टर करते रहे रेफर, इलाज के बिना एम्बुलेंस में ही मासूम ने तोड़ा दम

उत्तर प्रदेश के झांसी में डॉक्टर्स एक नवजात को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में भेजते रहे और नवजात ने एम्बुलेंस में ही दम तोड़ दिया. झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में एक नवजात बच्ची की इलाज के बिना एम्बुलेंस में ही मौत हो गई.

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झांसी : एक से दूसरे अस्पताल में नवजात बच्ची को डॉक्टर करते रहे रेफर, इलाज के बिना एम्बुलेंस में ही मासूम ने तोड़ा दम
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उत्तर प्रदेश के झांसी में डॉक्टर्स एक नवजात को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में भेजते रहे और नवजात ने एम्बुलेंस में ही दम तोड़ दिया. झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में एक नवजात बच्ची की इलाज के बिना एम्बुलेंस में ही मौत हो गई. इस बच्ची को मेडिकल कॉलेज से सिविल हॉस्पिटल रेफर किया गया था और सिविल हॉस्पिटल के डाक्टरों ने वापस मेडिकल कॉलेज भेज दिया. बच्ची के परिजनों का आरोप है कि मेडिकल कॉलेज में कोई डॉक्टर उसे देखने तक नहीं आया.

पांच घंटे तक पिता इधर-उधर भटकता रहा
मिली जानकारी के मुताबिक, नवजात बच्ची का पिता आज सुबह ही मेडिकल कॉलेज में पैदा हुई बच्ची की जान बचाने के एम्बुलेंस में करीब पांच घंटे इधर-उधर भटकता रहा. बच्ची को न तो झांसी जिला अस्पताल में भर्तिया किया गया और न ही मेडिकल कॉलेज ने. परिणाम ये हुआ कि बच्ची ने एम्बलेंस में ही दम तोड़ दिया. ललितपुर जिले के मड़रा थाना के अंतर्गत ग्राम तलुवा का रहने वाला 26 साल सोनू परिहार अपनी नवजात बच्ची का शरीर गोद में लिए इधर-उधर भटकता रहा लेकिन बच्ची बच नहीं पाई. 

दंपति की यह पहली संतान थी
जानकारी के मुताबिक, सोनू की शादी साल 2018 में हुई थी. किसी कारण उसे बच्चे नहीं हो रहे थे. पहली बार उसकी पत्नी गर्भवती हुई. प्रसव पीड़ा होने पर पत्नी को मड़ावरा सामुदायिक अस्पताल ले गया, जहां से उसे ललितपुर जिला अस्पताल में उसे रेफर कर दिया गया. ललितपुर से उसे झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया. पत्नी ने झांसी मेडिकल कॉलेज में आज सुबह करीब 7 बजे एक बच्ची को जन्म दिया. 


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बच्ची को हो रही थी परेशानी
बच्ची ने जन्म तो ले लिया लेकिन उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी. इस वजह डॉक्टर ने उसे झांसी जिला अस्पताल भेज दिया. डॉक्टरों का कहना ता कि उनके पास यहां व्यवस्थाएं नहीं हैं. सोनू अपनी बच्ची को प्राइवेट एम्बुलेंस में लेकर जिला अस्पताल पहुंचा लेकिन वहां वेंटिलेटर न होने की बात कहकर उसे वापस भेज दिया गया. एक असहाय पिता अपनी नवजात बच्ची को लेकर एम्बुलेंस में एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकता रहा और नवजात ने उसके हाथों में ही दम तोड़ दिया. यह सोनू और उसकी पत्नी की पहली बच्ची थी. झांसी मेडिकल कॉलेज के प्रशासन का कहना है कि पिछले साल अग्निकांड में एनआईसीयू वार्ड जल गया था. जो अभी बनकर तैयार नहीं हुआ है. इस वजह से बच्ची को जिला अस्पताल में भेजा गया था. हालांकि, बच्ची जब यहां आई तो जिंदा नहीं थी. 

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