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Waqf Amendment Bill: लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पर वोटिंग के दौरान जेडीयू सांसदों ने समर्थन किया था. जिसके बाद बिल के पक्ष में 288 वोट और विरोध में 232 वोट पड़े थे.
वक्फ संशोधन बिल का समर्थन करके नीतीश कुमार ने भले ही लोकसभा में इसे पास करा दिया हो, लेकिन उन्होंने अपनी लिए मुसीबत खड़ी कर ली है. इस विधयेक को जेडीयू में कलह शुरू हो गया है. JDU नेता मोहम्मद कासिम ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने सीएम नीतीश कुमार को अपना इस्तीफा भेजा है. इस इस्तीफे के पीछे वक्फ संशोधन बिल को आधार बताया जा रहा है. वहीं, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव गुलाम रसूल बलियावी और MLC गुलाम गौस ने भी नाराजगी जताई है.
लोकसभा में बुधवार को वक्फ संशोधन बिल पर वोटिंग के दौरान जेडीयू सांसदों ने समर्थन किया था. जिसके बाद बिल के पक्ष में 288 वोट पड़े, जबकि विरोध में 232 वोट पड़े. खुद को सेक्यूलर कहने वाली जेडीयू में इस बिल को लेकर बगावत शुरू हो सकती है. आने वाले समय में कई बड़े नेता पार्टी का साथ छोड़ सकते हैं. मुस्लिम संगठनों द्वारा कई बड़े नेताओं पर प्रेशर बनाना जा रहा है. इनमें एक गुलाम रसूल बलियावी भी हैं.
मोहम्मद कासिम अपने त्यागपत्र में लिखा, 'हमें पूरा विश्वास था कि आप विशुद्ध रूप से सेक्युलर विचारधारा के ध्वजवाहक हैं, लेकिन लोकसभा में आपके स्टैंड ने हमें निराश कर दिया. वक्फ बिल मुसलमानों के विरुद्ध है. हम किसी भी सूरत में इसे स्वीकार नहीं करेंगे. यह बिल संविधान के कई मौलिक अधिकारों का हनन करता है. इस बिल के माध्यम से मुसलमानों को जलील और रुसवा किया गया.'
वक्फ बिल को लेकर नीतीश कुमार से उम्मीद जताई जा रही थी कि वह इसका समर्थन नहीं करेंगे. सुशासन बाबू भले ही एनडीए में शामिल हों, लेकिन इस बिल पर वह कभी साथ नहीं देंगे. इसके लिए विपक्षी दलों से लेकर मुस्लिम संगठन तक बीजेपी के खिलाफ उन्हें जगाते रहे, लेकिन नीतीश ने सबका सपना तोड़ दिया. लेकिन नीतीश का यह कदम आगामी विधानसभा चुनाव में भारी न पड़ जाए.
हालांकि, जेडीयू ने वक्फ बिल को लेकर सरकार के कई अहम सुझाव दिए थे. इनमें पहला सुझाव यह था कि इस नए कानून को पिछली तारीख से लागू नहीं करना चाहिए. यामी मौजूदा पुरानी मस्जिदों, दरगाहों और अन्य मुस्लिम धार्मिक स्थलों के साथ कोई छेड़छाड़ न हो. वक्फ में यह भी प्रावधान होना चाहिए कि जमीन राज्यों का विषय है. इसलिए राज्यों की स्पष्ट राय ली जानी चाहिए.
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