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Jammu and Kashmir Rain: जम्मू कश्मीर के जम्मू क्षेत्र में बारिश की वजह से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है. अब तक जम्मू में बाढ़ग्रस्त इलाकों से 5000 से ज्यादा लोगों को रेस्क्यू किया गया है.
जम्मू कश्मीर के जम्मू क्षेत्र में बारिश की वजह से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है. अब तक जम्मू में बाढ़ग्रस्त इलाकों से 5000 से ज्यादा लोगों को रेस्क्यू किया गया है. मौसम विभाग ने जम्मू-कश्मीर के अलग-अलग इलाकों में 5 सितंबर तक बारिश की संभावना जताई है. बारिश के बाद हुए जलभराव की वजह से पानी, बिजली और इंटरनेट सेवाओं में बाधा आ रही है. फिलहाल स्कूल-कॉलेजों को बंद करने का आदेश दिया गया है. राहत बचाव कार्यों के लिए भारतीय सेना को तैनात करना पड़ा है. जम्मू में हुई बारिश के कारण पड़ोसी राज्य पंजाब के कुछ हिस्सों में भी बाढ़ आ गई.
जम्मू में 115 साल में पहली बार हुई इतनी बारिश
PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, जम्मू में बीते 24 घंटे में 380 मिलीमीटर बारिश हुई है. साल 1910 में जम्मू में वेदर ऑब्ज़र्वेटरी की स्थापना की गई थी. उसके बाद से 24 घंटे में हुई ये सबसे ज्यादा बारिश है. इससे पहले 25 सितंबर 1988 को 270.4 मिलीमीटर बारिश हुई थी.1996 में हुई भारी बारिश ने भी यह रिकॉर्ड नहीं तोड़ा था.
LG ने बताया- हरसंभव सहायता दी जा रही
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने X पर एक पोस्ट में कहा, “निचले बाढ़ग्रस्त इलाकों से 5,000 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है. सेना, NDRF और SDRF, संभागीय आयुक्त कार्यालय के साथ समन्वय में काम कर रहे हैं. हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि राहत सामग्री की पर्याप्त आपूर्ति हो और प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता दी जा रही है.”
LG ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे उन क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर बिजली, संचार और जलापूर्ति बहाल करना सुनिश्चित करें जहां बाढ़ का पानी कम हो रहा है.
वैष्णो देवी मंदिर मार्ग पर लैंडस्लाइड, 34 लोगों की मौत
जम्मू और कश्मीर में कटरा के पास वैष्णो देवी मंदिर के पास भारी बारिश के कारण हुई लैंडस्लाइड में 34 लोगों की जान चली गई है. भूस्खलन मंदिर के रास्ते में अर्धकुमारी के पास हुआ. इस घटना को लेकर LG ने कहा, "यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. कल दोपहर बादल फटने के कारण यात्रा बंद कर दी गई थी, लेकिन अर्धकुंवारी के पास बादल फटने के कारण कई लोग पानी के बहाव में बह गए. कई अनमोल जानें चली गईं और कई घायल हुए. मैंने घायलों से मुलाकात की है, उनकी हालत स्थिर है और उन्हें उचित उपचार दिया जा रहा है. कई मृतकों की पहचान हो गई है और उनके शव को घर भेजने की व्यवस्था की जा रही है. मृत्यु के लिए कोई मुआवजा नहीं है, लेकिन श्राइन बोर्ड की नीति के अनुसार 5 लाख रुपये दिए जाते हैं, आपदा प्रबंधन भी मृतकों के परिजनों को 4 लाख रुपये देगा."
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