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जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों के चलते उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया. उनके इस इस्तीफे से राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है.
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे से राजनीति गलियारों में अलग अलग चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है. इसके पीछे अलग अलग वजहों को माना जाता है. महज 12 दिन पहले ही धनखड़ ने जेएनयू के एक आयोजन में कहा था कि 2027 में ईश्वरीय कृपा से मैं सेवानिवृत्त हो जाऊँगा, लेकिन अचानक ही सोमवार को 74 वर्षीय धनखड़ ने स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बताकर अपने पदों से इस्तीफा दे दिया. अब एक तरफ लोग धरखड़ के इस्तीफे की वजह पता लगाने में जुटे हैं. वहीं धनखड़ के इस्तीफे के बाद राज्यसभा को चलाने की जिम्मेदारी उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह को दी गई है. सिंह ने 22 जुलाई को राष्ट्रपति से मुलाकात भी की है. आइए जानते हैं उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे की पीछे की वजह क्या हो सकती है ...
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे की कई वजह मानी जा रही हैं. राजनीतिक गलियारों में इसे सरकार से लेकर पर्सनल रूप से लिया जाता है. उपराष्ट्रपति कार्यालय या सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. इस वजह से भी धनखड़ के इस्तीफे से राजनीतिक हलकों में अटकलों का बाजार गर्म हो गया है. वहीं भाजपा नेता भी धनखड़ के इस्तीफा देने की वजह या उस पर प्रतिक्रिया देने से बच रहे हैं. वहीं इस्तीफे के 15 घंटे बाद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ट्वीट तक नहीं किया.
रिपोर्ट्स की मानें तो यह सच है कि उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. उनके हार्ट डिजीज का इलाज चल रहा है, लेकिन संसद के मानसून सत्र के पहले दिन की घटनापूर्ण कार्यवाही के बाद उनके चुपचाप इस्तीफे ने कुछ और कारणों को भी हवा दे दी है. इसके पीछे की वजह सिर्फ बीमारी ही नहीं, ये भी हो सकती हैं.
अटकले हैं कि जगदीप धनखड़ का अचानक से इस्तीफा बिहार चुनाव से जुड़ा हो सकता है. बिहार चुनाव से पहले धनखड़, नीतीश कुमार के लिए अगला उपराष्ट्रपति बनने का रास्ता बना रहे हैं. इस बार भाजपा बिहार में ज़्यादा सीटें जीतने की उम्मीद में है, इसलिए नीतीश को इनाम के रूप में उन्हें उपराष्ट्रपति बनाना एक रणनीति हो सकती है. भाजपा विधायक हरिभूषण ने एक प्रेसवार्ता में कहा कि अगर नीतीश कुमार को उपराष्ट्रपति बनाया जाये तो बिहार के लिए यह बहुत अच्छा होगा. विधायक के इस बयान ने इस बात को हवा दे दी है कि कहीं यह नीतीश और बिहार के चुनाव के लिए तो नहीं किया जा रहा है.
मंगलवार को जगदीप धनखड़ राज्यसभा की कार्यवाही की अध्यक्षता करने नहीं आए. नियमों के अनुसार, सभापति की अनुपस्थिति में राज्यसभा की कार्यवाही उपसभापति की अध्यक्षता में होती है. हरिवंश नारायण सिंह 2020 से इस पद पर कार्यरत हैं. अब हरिवंश चुनाव होने तक शेष सत्र के लिए कार्यवाही की अध्यक्षता करने के लिए तैयार हैं, इसलिए बिहार के एक नेता द्वारा उच्च सदन में फैसले लेने की संभावना चुनावों से पहले एनडीए के लिए अच्छी खबर है. हरिवंश नारायण सिंह ने मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात भी की है.
सोमवार को धनखड़ ने घोषणा की कि उन्हें 68 विपक्षी सांसदों द्वारा हस्ताक्षरित एक नोटिस मिला है, जिसमें न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को हटाने की मांग की गई है, जिनके घर से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद हुई थी, और वह इसे स्वीकार कर रहे हैं.
उपराष्ट्रपति द्वारा विपक्ष के नोटिस पर कार्रवाई करने में कथित जल्दबाजी, वह भी ऐसे समय में जब सरकार लोकसभा में विपक्ष द्वारा प्रायोजित प्रस्ताव पेश कर रही थी, ने एनडीए को अपनी बड़ाई करने का अधिकार छीन लिया.
सरकार की नाराजगी को और बल तब मिला जब राज्यसभा में सदन के नेता जे.पी. नड्डा और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने धनखड़ द्वारा बाद में बुलाई गई बैठक में हिस्सा नहीं लिया.
राज्यसभा की कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) की यह बैठक एक महत्वपूर्ण बैठक थी. यह समिति बहस और विधायी कार्यों के लिए समय आवंटन की सिफारिश करती है.
हालांकि, नड्डा ने कहा कि मंत्री महत्वपूर्ण कार्य में व्यस्त थे और उन्होंने राज्यसभा के सभापति को पहले ही सूचित कर दिया था.
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