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'कितने चले गए, कितने आए...', ISRO में वैज्ञानिकों के इस्तीफों पर आया जितेंद्र सिंह का बयान

जितेंद्र सिंह ने इसरो को भेजे गए मेमोरेंडम पर सवाल के जवाब में कहा कि सिर्फ प्रशासनिक कारणों से निर्देश दिए गए थे, ताकि ज्यादा मेच्योर लेवल पर फैसले लिए जा सकें.

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'कितने चले गए, कितने आए...', ISRO में वैज्ञानिकों के इस्तीफों पर आया जितेंद्र सिंह का बयान

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह (फाइल फोटो, ANI)

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इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO) के 100 से ज्यादा वैज्ञानिकों के इस्तीफे के बीच केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह का बयान आया है. उन्होंने कहा है कि स्पेस एजेंसी के पास बड़ी वर्कफोर्स है, जैसे-जैसे लोग छोड़ते हैं, वैसे ही नए लोग जुड़ जाते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि वैज्ञानिकों के छोड़कर जाने के पीछे कोई विवाद नहीं है और इसरो सेंटर्स को जो नए दिशा-निर्देश दिए गए हैं, उसके पीछे की वजह सिर्फ प्रशासनिक है ताकि ज्यादा मेच्योर लेवल पर फैसले लिए जा सकें.

गुरुवार (16 जुलाई, 2026) को केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कुंडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट (KKNPP) से संवेदनशील डेटा लीक होने के मुद्दे और अंतरिक्ष विभाग की ओर से इसरो को भेजे गए मेमोरेंडम से जुड़े सवालों को लेकर जवाब दिया.

वैज्ञानिकों के रिजाइन पर क्या बोले जितेंद्र सिंह?
जितेंद्र सिंह ने मेमोरेंडम पर सवाल के जवाब में कहा कि सिर्फ प्रशासनिक कारणों और अन्य वजहों से निर्देश दिए गए थे. उन्होंने कहा कि प्रशासनिक कारणों से मेमोरेंडम भेजा गया ताकि ज्यादा मेच्योर लेवल पर फैसले लिए जा सकें. जितेंद्र सिंह ने कहा, 'इसरो के पास बड़ी वर्कफोर्स है, जैसे-जैसे लोग छोड़ते हैं, नए लोग शामिल हो जाते हैं. कितने चले गए और कितने आए.' उन्होंने साफ किया कि इस मामले में कोई विवाद नहीं है.'

केकेएनपीपी के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पूरे हंगामे का असल में उस रणनीतिक सुविधा से कोई लेना-देना नहीं था. उन्होंने समीक्षा की जरूरत पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब कुछ हुआ ही नहीं तो इसकी क्या आवश्यकता है.

वैज्ञानिकों के इस्तीफे के बाद सरकार की नई पॉलिसी
इसरो के यूआर राव सैटेलाइट सेंटर, एलवीएम3 रॉकेट और गगनयान जैसे महत्वपूर्ण मिशनों पर काम कर रहे 120 वैज्ञानिक इस्तीफा दे चुके हैं, जिनमें ग्रुप ए के वैज्ञानिक भी शामिल हैं. इनमें से कई चंद्रयान-3,  एलवीएम-3 और SpaDeX जैसे सक्सेसफुल प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर चुके हैं.

कुछ वैज्ञानिकों ने वीआरएस के लिए अर्जी दी है और कुछ ने रिजाइन कर दिया. इनमें से कई गगनयान जैसे मिशन में काम कर रहे हैं, ऐसे में सरकार की चिंता बढ़ गई है. सरकार ने 14 जुलाई को इसरो के देशभर में विभिन्न सेंटर्स को मेमोरेंडम भेजकर निर्देश दिए हैं कि अब वीआरएस या रिजाइन की अर्जी पर सामान्य प्रक्रिया नहीं होगी. सेंटर के निदेशक सिफारिश के साथ अंतरिक्ष विभाग को अर्जियां भेजेंगे और आखिरी फैसला विभाग लेगा.

 

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