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'शस्त्र उठाने में गलत क्या, यह राम को सम्मान देने का तरीका', बंगाल में रामनवमी जुलूस के दौरान तलवारें लहराए जाने पर बोले BJP नेता

Ram Navami: बीजेपी नेता दिलीप घोष ने कहा कि हिंदू समाज अब खुद जवाब दे रहा है. रामनवमी की शोभायात्रा इसी का नतीजा है. हर साल इसमें उत्साह बढ़ रहा है.

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'शस्त्र उठाने में गलत क्या, यह राम को सम्मान देने का तरीका', बंगाल में रामनवमी जुलूस के दौरान तलवारें लहराए जाने पर बोले BJP नेता

बीजेपी विधायक अग्निमित्रा पॉल के हाथ में तलवार (बांय)

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पश्चिम बंगाल में रामनवमी के दौरान लोगों ने हाथ में हथियार लेकर धार्मिक जुलूस निकाला. किसी के हाथ में तलवार, तो किसी के हाथ में लाठी नजर आई. आसनसोल में बीजेपी विधायक अग्निमित्रा पॉल भी खुद हाथ में तलवार लेकर लहराती नजर आईं. इस मामले में बीजेपी नेता दिलीप घोष का बयान आया है. उन्होंने यह कोई अपराध नहीं है. यह हिंदू समुदाय की अपनी सुरक्षा का एक साधन है. घोष ने कहा, 'अगर किसी ने राम के सम्मान में शस्त्र उठाया, तो इसमें गलत क्या है? यह राम को सम्मान देने का तरीका है.'

दिलीप घोष ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में हिंदू समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है. मंदिरों को तोड़ा और मूर्तियों को चोरी किया जा रहा है. इतना ही नहीं पंडालों में आग लगाई जा रही है. अगर ऐसी स्थिति में अगर हिंदू खुद की रक्षा के लिए हथियार लेकर निकलता है तो यह कैसा अपराध है?

उन्होंने कहा, 'अगर कोई हथियार लेकर चलता है तो इसमें क्या अपराध है?' घोष का उन खबरों के बाद आई जहां राज्य के कई जिलों में रामनवमी के जुलूस के दौरान लोग हथियार लहराते दिखे. मालदा में निषेधाज्ञा के बावजूद रामकृष्ण पल्ली मैदान से जुलूस के दौरान बड़ी तलवारें लहराई गईं. हावड़ा में भी पुलिस अनुमति के बिना लोग हथियार लेकर रैलियों में नजर आए.

दिलीप घोष ने कहा, 'हिंदू समाज अब खुद जवाब दे रहा है. रामनवमी की शोभायात्रा इसी का नतीजा है. हर साल इसमें उत्साह बढ़ रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस का काम शोभायात्रा में बाधा डालना नहीं, बल्कि बाधा डालने वालों को रोकना है. अगर पुलिस यह नहीं करेगी, तो राम अपना काम खुद करेंगे.

'लोग खुद अपनी रक्षा के लिए आ जाएंगे आगे'

घोष ने ममता सरकार पर निशाना साधते हुए काह कि बंगाल में धार्मिक या राजनीतिक आयोजनों के लिए कोर्ट से इजाजत लेनी पड़ती है, क्योंकि राज्य सरकार पुलिस को अनुमति नहीं देती. उन्होंने हिंदू समाज के गुस्से को रेखांकित करते हुए अगर ऐसा ही चलता रहा तो लोग खुद अपनी रक्षा के लिए आगे आएंगे.

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