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ईरान-इजरायल की लड़ाई में कच्चे तेल की सप्लाई में आ सकती है बड़ी उथल-पुथल, जानें भारत पर कितना होगा असर?

ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने की धमकी से भारत की 30% तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है. सरकार इस पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है. आइए जानते हैं ईरान के इस फैसले के बाद भारत पर कितना असर पड़ सकता है.

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ईरान-इजरायल की लड़ाई में कच्चे तेल की सप्लाई में आ सकती है बड़ी उथल-पुथल, जानें भारत पर कितना होगा असर?
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ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है. ईरान ने अमेरिकी दखल के विरोध में होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी दी है, जिससे भारत सहित कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर असर पड़ सकता है. यह वही समुद्री रास्ता है, जिससे भारत अपने कुल कच्चे तेल का लगभग 30 फीसदी हिस्सा आयात करता है. ऐसे में इस बंदी से न केवल तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, बल्कि इसकी कीमतों पर भी असर दिख सकता है. 

भारत पर इसका बड़ा असर नहीं

ईरान की संसद से होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का प्रस्ताव पास हो चुका है और अब अंतिम फैसला ईरान की सुप्रीम काउंसिल को लेना है. अगर यह रास्ता बंद होता है, तो भारत को सीधे तौर पर झटका लग सकता है, क्योंकि भारत प्रतिदिन करीब 1.5 से 2 मिलियन बैरल कच्चा तेल इसी रास्ते से मंगाता है. हालांकि केंद्र सरकार का मानना है कि भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर इसका बड़ा असर नहीं होगा. भारत अब 40 देशों से कच्चा तेल आयात कर रहा है, जिसमें रूस का हिस्सा लगभग 38% तक पहुंच गया है. इसके अलावा ब्राजील, बोलिविया जैसे देशों से भी भारत तेल मंगा रहा है. 


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एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर सकती है सरकार 

ईरान इजरायल तनाव के बीच तेल कंपनियों की लागत जरूर बढ़ सकती है, लेकिन सरकार चुनावी माहौल को देखते हुए पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें बढ़ने नहीं देगी. आपको बता दें इसी साल के अंत मे बिहार में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. सूत्रों के अनुसार, यदि जरूरत पड़ी तो सरकार एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर सकती है, जैसा पहले भी नवंबर 2021, मई 2022 और मार्च 2024 में किया गया था. फिलहाल, तेल मंत्रालय हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और रोजाना समीक्षा बैठकें हो रही हैं. वहीं, भारत के पास फिलहाल पर्याप्त तेल भंडार मौजूद है और एलपीजी की 50% घरेलू जरूरत घरेलू उत्पादन से पूरी की जा रही है.

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