भारत
मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि अपराध का पता लगाने के उद्देश्य से सीक्रेट सर्विलांस की अनुमति नहीं है. कोर्ट ने गृह मंत्रालय के 2011 के आदेश को रद्द कर दिया.
मद्रास हाईकोर्ट ने एक मामले में फैसला सुनाते हुए कहा किसी व्यक्ति की फोन बातचीत को सिर्फ क्राइम का पता लगाने के लिए नहीं रोका जा सकता है. कोर्ट ने गृह मंत्रालय के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें 2011 में CBI को चेन्नई के किशोर नामक शख्स के फोन कॉल और कम्युनिकेशन को रोकने के आदेश दिया था. किशोर ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में चुनौती दी थी.
मद्रास हाईकोर्ट में दायर याचिका में किशोर ने मांग की कि उनको अपने फोन पर बातचीत करने की अनुमति दी जाए और गृह मंत्रालय का फैसला रद्द किया जाए. किशोर की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एन आनंद वेंकटेश ने कहा कि जब तक कानूनी रूप से उचित न हो, किसी व्यक्ति की फोन बातचीत को रोकना उनके निजता के अधिकार का उल्लंघन है.
जस्टिस वेंकटेशन ने कहा कि अपराध का पता लगाने के उद्देश्य से सीक्रेट सर्विलांस की अनुमति नहीं है. हाईकोर्ट ने गृह मंत्रालय द्वारा जारी 2011 के आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें इस तरह का प्राधिकरण दिया गया था.
न्यायाधीश ने यह भी स्पष्ट किया कि फोन टैपिंग की अनुमति सिर्फ सार्वजनिक सुरक्षा और सार्वजनिक आपातकाल के मामलों में ही दी जा सकती है. प्राइवेट कम्युनिकेशन की निगरानी का सिर्फ राष्ट्र की संप्रभुता, अखंडता और सुरक्षा, विदेशी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों, सार्वजनिक व्यवस्था या अपराध की रोकथाम से जुड़ी परिस्थितियों में ही अनुमति है.
हालांकि, इस मामले में इसका सार्वजनिक आपातकाल या सार्वजनिक सुरक्षा से कोई संबंध नहीं था. इसलिए कोर्ट ने गृह मंत्रालय के आदेश को रद्द कर दिया.
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