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Surrogate मां के लिए अनिवार्य होगा बीमा कवर, अब नहीं होगा महिलाओं का शोषण

केंद्र ने सरोगेसी को लेकर नए नियम जारी किए हैं जिसके तहत सेरोगेट मां को पहले से कहीं अधिक अधिकार दिए गए हैं साथ ही उनके शोषण को लेकर भी नए प्रावधान किए हैं.

Surrogate मां के लिए अनिवार्य होगा बीमा कवर, अब नहीं होगा महिलाओं का शोषण
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डीएनए हिंदी: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत नियमों को अधिसूचित किया है, जो माता-पिता बनने के लिए सरोगेसी का विकल्प चुनने वाले जोड़ों के लिए कुछ शर्तों को सूचीबद्ध करता है.  21 जून को अधिसूचित नियमों में कहा गया है कि सरोगेसी के लिए जाने वाले जोड़ों को 36 महीने की अवधि के लिए सरोगेट मां के पक्ष में एक सामान्य स्वास्थ्य बीमा कवरेज खरीदना होगा और बीमा राशि को सभी जटिलताओx के लिए पर्याप्त रूप से खर्च करना होगा. 

पीटीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि अब स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा अधिसूचित नियमों के अनुसार सरोगेट मां पर किसी भी सरोगेसी प्रक्रिया के तीन से अधिक प्रयास नहीं किए जा सकते हैं. साथ ही, मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट, 1971 के अनुसार सरोगेसी की प्रक्रिया के दौरान सरोगेट मदर को गर्भपात के लिए जाने की अनुमति दी जा सकती है.

परिजनों को मिलेगा पैसा

आमतौर पर इस तरह की शिकायतें आती थीं कि सरोगेसी के लिए तैयार महिलाओं को प्रसव पूर्व या बाद में अधर में छोड़ दिया जाता है, जिस कारण उन्हें कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. इस बीमा में सरोगेसी के लिए तैयार महिला के मां बनने की प्रक्रिया के दौरान मृत्यु होने पर उनके परिवार को बीमा राशि मिलने का भी प्रावधान होगा.

सरकार ने अधिसूचना में ये भी साफ कर दिया है कि कोई भी महिला तीन बार से ज्यादा सरोगेसी प्रक्रिया से नहीं गुजर सकेगी. स्वास्थ्य से जुड़े विशेषज्ञों का ये मानना था कि नियमों के ना होने के कारण चोरी छिपे गरीब महिलाओं का शोषण भी होता था, जिसका उनकी शारीरिक स्थिति पर काफी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता था लेकिन अब तीन बार से ज्यादा कोई भी महिला सरोगेसी प्रक्रिया से नहीं गुजर सकेगी.

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गर्भपात का होगा विकल्प

नियमों में गर्भपात का भी खास जिक्र किया गया है. सरोगेट मां को प्रेगनेंसी के दौरान अगर डाक्टर अबार्शन की सलाह देते हैं तो महिला के पास तय कानून के मुताबिक ऐसा करवाने का अधिकार होगा. केंद्र सरकार ने सरोगेसी करने वाले निजी अस्पतालों और क्लिनिकों के लिए भी नियम तय कर दिए हैं. ऐसे सभी संस्थानों को अपना रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी होगा और इसके लिए दो लाख रुपये की फीस अदा करने होगी, जो वापस नहीं होगी.

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