भारत
विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश में एक हिंदू पुजारी की गिरफ्तारी के विरोध में सोमवार को त्रिपुरा के अगरतला में बांग्लादेश सहायक उच्चायोग पर हुए हमले की निंदा की.
त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में बांग्लादेश के सहायक उच्चायोग में परिसर में घुसपैठ और तोड़फोड़ की गई. केंद्र सरकार ने इस घटना पर अफसोस जताया है. भारत ने घटना को बेहद खेदजनक बताया और कहा कि किसी भी परिस्थिति में वाणिज्य दूतावास की संपत्तियों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए. सरकार ने राजधानी स्थित उच्चायोग एवं अन्य शहरों में स्थित बांग्लदेश के मिशनों की सुरक्षा बढ़ाने का आश्वासन दिया है.
MEA का यह बयान त्रिपुरा में बांग्लादेशी मिशन के आसपास कई लोगों द्वारा एक विशाल रैली निकाले जाने के कुछ ही घंटों बाद आया है, जिसमें बांग्लादेश में हिंदू भिक्षु चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी और पड़ोसी देश में हिंदुओं पर हो रहे हमलों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया था.
50 से अधिक प्रदर्शनकारी घुसे
न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार, सोमवार को 50 से अधिक प्रदर्शनकारियों ने अगरतला स्थित बांग्लादेशी मिशन परिसर में प्रवेश किया. मंत्रालय ने एक बयान में कहा, 'अगरतला में बांग्लादेश के सहायक उच्चायोग में परिसर में घुसपैठ की आज की घटना बेहद दुखद है. किसी भी परिस्थिति में राजनयिक और वाणिज्य दूतावास की संपत्तियों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए.' इसमें कहा गया है कि सरकार दिल्ली में बांग्लादेश के उच्चायोग और देश भर में अन्य उप और सहायक उच्चायोगों की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने के लिए कार्रवाई कर रही है.
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले की निंदा
बता दें, इससे पहले, विदेश मंत्रालय ने 29 नवंबर को हिंदुओं पर लक्षित हमलों को लेकर बांग्लादेश पर हमला किया था और कहा था कि अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की बढ़ती घटनाओं को केवल 'मीडिया की अतिशयोक्ति' कहकर खारिज नहीं किया जा सकता. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार से सभी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की उनकी जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया था.
'बांग्लादेश में हो हिंदुओं की सुरक्षा'
जायसवाल ने कहा, 'भारत ने बांग्लादेश सरकार के समक्ष हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर धमकियों और लक्षित हमलों के मुद्दे को लगातार और मजबूती से उठाया है. हिंसा और उकसावे की बढ़ती घटनाओं को केवल मीडिया की अतिशयोक्ति के रूप में खारिज नहीं किया जा सकता. हम बांग्लादेश से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए कदम उठाने का आह्वान करते हैं.' पिछले सप्ताह बांग्लादेश ने भारत के आरोपों को 'निराधार' बताया और कहा कि वे देश में सभी धर्मों के लोगों के बीच मौजूद सद्भाव को नहीं दर्शाते हैं.
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