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ट्रेन से बेडशीट या टॉवल चुराया तो क्या होगी कार्रवाई? जानिए रेलवे के नियम

भारतीय ट्रेनों में सफर के दौरान मिलने वाले एसी कोच के बेडशीट, कंबल और टॉवल को घर ले जाना अब यात्रियों को बेहद भारी पड़ सकता है.

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ट्रेन से बेडशीट या टॉवल चुराया तो क्या होगी कार्रवाई? जानिए रेलवे के नियम

ट्रेन के सामान की चोरी पड़ेगी भारी (AI Image)

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  • पिछले 4 सालों में ट्रेनों से लगभग 104 करोड़ रुपये के बेडशीट, कंबल और तौलिए चोरी 
  • ट्रेन से बेडरोल चुराना सीधे तौर पर सरकारी संपत्ति की चोरी माना जाता है
  • ऐसे आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाता है
  • दोषी पाए जाने पर यात्री को 1 से 5 साल तक की जेल और भारी जुर्माना हो सकता है

भारतीय ट्रेनों में सफर के दौरान रेलवे यात्रियों को आरामदेह सफर देने के लिए तकिया, चादर और तौलिया मुहैया कराता है. लेकिन हाल ही में सामने आई मीडिया रिपोर्ट्स और रेलवे के आंकड़ों ने सबको चौंका दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 4 सालों में ट्रेनों से करोड़ों रुपये के बेडशीट, कंबल और टॉवल चोरी हो चुके हैं. कई यात्री सफर खत्म होने के बाद इन्हें चुपके से अपने बैग में डाल लेते हैं. अगर आप भी इसे एक आम बात समझते हैं, तो सावधान हो जाइए. रेलवे के नियमों के मुताबिक, ऐसा करना एक गंभीर अपराध है और इसके लिए आपको जेल भी जाना पड़ सकता है.

चोरी पर क्या कहता है रेलवे का कानून?

भारतीय रेलवे में चोरी को रोकने और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं. अगर कोई यात्री ट्रेन से चादर, तौलिया, तकिया या कंबल चुराते हुए पकड़ा जाता है, तो उसके खिलाफ रेलवे एक्ट, 1989 की धारा 145 और 147 के तहत कार्रवाई की जा सकती है. इसके अलावा, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या चोरी करने के मामले में रेलवे संपत्ति (अवैध कब्जा) अधिनियम यानी RPUP एक्ट के तहत भी मुकदमा दर्ज होता है.

पकड़े जाने पर कितनी होगी सजा और जुर्माना?

ट्रेन से बेडरोल का सामान चुराना सीधे तौर पर सरकारी संपत्ति की चोरी का मामला बनता है. इस अपराध के लिए दोषी पाए जाने पर यात्री को 1 साल से लेकर अधिकतम 5 साल तक की जेल की सजा हो सकती है. जेल के साथ-साथ यात्री पर भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है. पहली बार पकड़े जाने पर जुर्माना थोड़ा कम हो सकता है, लेकिन दोबारा ऐसा करते पकड़े जाने पर कड़ी सजा और ज्यादा जुर्माने का प्रावधान है.

एक बार अगर आरपीएफ ने चोरी के मामले में आपका चालान कर दिया, तो आपका क्रिमिनल रिकॉर्ड बन जाता है, जिससे भविष्य में सरकारी नौकरी या पासपोर्ट वेरिफिकेशन में बड़ी दिक्कत आ सकती है.

करोड़ों का चूना लगा रहे हैं यात्री

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, हर साल लाखों की तादाद में चादरें और तौलिए गायब हो जाते हैं. लोग अक्सर यह सोचकर टॉवल या बेडशीट बैग में रख लेते हैं कि हमने टिकट के पैसे दिए हैं, तो यह हमारा है. लेकिन टिकट की कीमत सिर्फ उस सुविधा को इस्तेमाल करने के लिए होती है, उसे घर ले जाने के लिए नहीं. इस चोरी की वजह से रेलवे को हर साल करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है, जिसका सीधा असर रेलवे की अन्य सुविधाओं पर पड़ता है.

कैसे की जाती है निगरानी?

ट्रेनों में सफर खत्म होने से पहले कोच अटेंडेंट सभी यात्रियों से बेडरोल का सामान वापस मांगते हैं. अगर कोई सामान कम निकलता है, तो उसकी जवाबदेही अटेंडेंट की होती है. यही वजह है कि अब रेलवे स्टाफ इस मामले में काफी सख्त हो गया है. अगर कोई यात्री सामान देने से मना करता है या बैग में छिपाता है, तो अटेंडेंट तुरंत आरपीएफ को इसकी सूचना दे सकते हैं, और अगले स्टेशन पर यात्री की तलाशी ली जा सकती है. 

अगली बार जब आप एसी कोच में सफर करें, तो रेलवे की संपत्ति को अपनी संपत्ति समझकर उसकी सुरक्षा करें, न कि उसे घर ले जाने की भूल करें. एक छोटी सी लापरवाही आपको सलाखों के पीछे पहुंचा सकती है.

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