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यमन में भारतीय नर्स निमिषा प्रिया की मौत की सजा रद्द कर दी गई है. ग्रैंड मुफ्ती कार्यालय ने इसकी पुष्टि की है. हालांकि अभी यमन की ओर से आधिकारिक सूचना नहीं मिली है.
यमन में भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को दी गई मौत की सज़ा पूरी तरह से रद्द कर दी गई है. यह जानकारी भारत के ग्रैंड मुफ़्ती कंथापुरम एपी अबुबकर मुसल्लर के कार्यालय द्वारा जारी एक बयान में दी गई. हालांकि, बयान में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यमन सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक लिखित पुष्टि नहीं मिली है. बयान में कहा गया है कि निमिषा प्रिया की मौत की सज़ा, जिसे पहले निलंबित कर दिया गया था, अब पूरी तरह से रद्द कर दी गई है.
'एएनआई' के अनुसार, ग्रैंड मुफ़्ती के कार्यालय ने बताया कि यह निर्णय यमनी राजधानी सना में हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक में लिया गया. निमिषा प्रिया का मामला 2018 से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में है. निमिषा प्रिया पर अपने बिज़नेस पार्टनर की हत्या और बाद में उसके शव के टुकड़े-टुकड़े करने का आरोप है. उन्हें मार्च 2018 में हत्या का दोषी ठहराया गया था और 2020 में एक यमनी अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई थी.
Indian Grand Mufti, Kanthapuram AP Abubakker Muslaiyar’s office says, "The death sentence of Nimisha Priya, which was previously suspended, has been overturned. A high-level meeting held in Sanaa decided to completely cancel the death sentence that was temporarily suspended… https://t.co/tD1NVQtM9C
— ANI (@ANI) July 29, 2025
निमिषा प्रिया का मामला क्या है?
निमिषा प्रिया का जन्म केरल में एक दिहाड़ी मजदूर के घर हुआ था. अपनी परिस्थितियों को बदलने के लिए, निमिषा ने नर्सिंग का कोर्स किया और बेहतर अवसरों की तलाश में 2008 में यमन चली गईं. 2011 में, उन्होंने इडुक्की निवासी टॉमी थॉमस से शादी की. दंपति यमनी राजधानी सना में बस गए, जहाँ उनकी एक बेटी हुई. इसके बाद, निमिषा प्रिया और टॉमी ने अपना खुद का मेडिकल क्लिनिक शुरू करने का फैसला किया. यमनी नियमों के कारण, जो विदेशियों को स्वतंत्र रूप से व्यवसाय पंजीकृत करने से रोकते हैं, निमिषा प्रिया को एक स्थानीय साझेदार की आवश्यकता थी. इसके बाद, निमिषा ने अपने पुराने सहयोगी तलाल अब्दो महदी को एक व्यावसायिक साझेदारी के लिए नियुक्त किया, लेकिन यह साझेदारी जल्द ही टूट गई जब निमिषा प्रिया ने उन पर एक समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव डाला, जिसमें तलाल अब्दो महदी को 67% और उनके पूर्व नियोक्ता को 33% स्वामित्व दिया गया.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महदी ने निमिषा को परेशान करना शुरू कर दिया और खुद को सार्वजनिक रूप से उसका पति बताने लगा. इतना ही नहीं, उसने निमिषा का पासपोर्ट भी जब्त कर लिया ताकि वह भारत वापस न आ सके. यमनी अधिकारियों के मुताबिक, 2017 में निमिषा ने महदी को बेहोश करके उसका पासपोर्ट वापस पाने की कोशिश की थी, लेकिन यह कोशिश जानलेवा साबित हुई. महदी की मौत संभवतः ओवरडोज़ से हुई. इसके बाद, यमनी अधिकारियों ने उसे गिरफ्तार कर लिया.
यमन की अदालत ने उसे मौत की सज़ा सुनाई. यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हुआ. मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उसकी सज़ा के ख़िलाफ़ अभियान चलाया. स्थिति तब और बिगड़ गई और गंभीर हो गई जब यमन के राष्ट्रपति रशद अल-अलीमी ने दिसंबर 2024 में मौत की सज़ा को मंज़ूरी दे दी और हूती विद्रोही नेता महदी अल-मशात ने भी जनवरी 2025 में इसकी पुष्टि कर दी. इसके बाद भारत में धार्मिक और कूटनीतिक स्तर पर उसके बचाव की कोशिशें तेज़ हो गईं.
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