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रूस-यूक्रेन युद्ध हो या ईरान-अमेरिका जंग, आधुनिक संघर्षों में सस्ते हमलावर ड्रोन का काफी उपयोग हो रहा है. इस तरह के हमलावर ड्रोन्स को हवा में ही इंटरसेप्ट करने के लिए भारत में एक खास सिस्टम विकसित किया गया है.
आधुनिक युद्धों में जिस तेजी से ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ रहा है, उसी तेजी से एंटी ड्रोन सिस्टम या ड्रोन इंटरसेप्टर भी विकसित किए जा रहे हैं. इस क्षेत्र में भारत के एक डिफेंस टेक्नोलॉजी स्टार्टअप ने नया राष्ट्रीय बेंचमार्क स्थापित किया है. हैदराबाद स्थित 'अपोलियन डायनामिक्स' ने 'आहुति Mk II' मल्टीरोटर इंटरसेप्टर विकसित किया है जो जिसने 498 किमी/घंटा की टॉप स्पीड दर्ज करके 'इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' में देश के सबसे तेज मल्टीरोटर ड्रोन के तौर पर जगह बनाई है.
आहुति Mk II एक हाई-स्पीड इलेक्ट्रिक मल्टीरोटर इंटरसेप्टर है. इसे हैदराबाद स्थित रक्षा तकनीक स्टार्टअप अपोलियन डायनामिक्स ने डिजाइन और विकसित किया है. आहुति एमके-II ने 498 किमी/घंटा की रफ्तार हासिल की है. इससे पहले का रिकॉर्ड लगभग 325 किमी/घंटा का था जिसकी तुलना में आहुति Mk II 170 किमी/घंटा तक तेज है.
BITS पिलानी हैदराबाद में इनक्यूबेट हो रही इस स्टार्टअप ने इस इंटरसेप्टर को खास तौर पर आधुनिक हवाई युद्ध की बदलती जरूरतों को पूरा करने के लिए विकसित किया है. रूस के जारी युद्ध के दौरान इस तरह के इंटरसेप्टर ड्रोन पहली बार यूक्रेन ने विकसित किए थे.
आहुति Mk II कोई सामान्य निगरानी, फोटोग्राफी या सामान ढोने वाला ड्रोन नहीं है. न ही ये हमलावर ड्रोन है. इसे खास तौर पर 'इंटरसेप्टर' के रूप में तैयार किया गया है, जो दुश्मन के कम-लागत वाले ड्रोन और सुसाइड ड्रोन का तेजी से पीछा करके उन्हें हवा में ही बेअसर कर सकता है. इससे पहले अपोलियन डायनामिक्स ने 2025 में जो मूल 'आहुति' मॉडल विकसित किया था उसकी रफ्तार लगभग 300 किमी/घंटा थी. इस देसी स्टार्टअप ने केवल एक साल से भी कम समय में इसकी गति में करीब 200 किमी/घंटा का इजाफा करते हुए इसे 498 किमी/घंटा तक पहुंचाया.
रूस-यूक्रेन युद्ध हो या ईरान-अमेरिका युद्ध, आधुनिक संघर्षों में सस्ते हमलावर ड्रोन का काफी उपयोग हो रहा है. ऐसे सस्ते खतरों को नष्ट करने के लिए करोड़ों रुपये की महंगी मिसाइलें दागना आर्थिक रूप से नुकसानदेह होता है. इसकी तुलना में आहुति एमके-II एक कम लागत वाला और बेहद तेज समाधान प्रदान करता है.
मिरर नाऊ की एक रिपोर्ट के अनुसार, 498 किमी/घंटा की रफ्तार को हासिल करने के लिए आहुति एमके-II के फ्रेम, मोटर और प्रोपल्शन कॉन्फ़िगरेशन में लगभग 10 बार सुधार किया गया. उड़ान के दौरान इसमें लगभग 400 एम्पीयर का बर्स्ट करंट इस्तेमाल किया गया. कंपनी के संस्थापक जयंत खत्री और शौर्य चौधरी के अनुसार, अपोलियन डायनामिक्स के कुछ अनमैन्ड सिस्टम्स का भारतीय सेना की इकाइयों द्वारा पहले ही परिचालन परीक्षण किया जा चुका है. कंपनी का लक्ष्य 2030-2032 तक उन्नत पावर क्रूज मिसाइल प्लेटफॉर्म विकसित करना है.