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180 किलोमीटर रेंज, 450 kmph स्पीड, कितना खतरनाक है इंडियन आर्मी का 'अग्निवेग' अटैक ड्रोन?

Indian Army Drone Power: भारतीय सेना को हाल ही में देश में बने वन-वे अटैक ड्रोन अग्निवेग की डिलीवरी की गई है. इसकी रफ्तार और रेंज इसे बाकी लोइटरिंग म्यूनिशन से अलग बनाती है.

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180 किलोमीटर रेंज, 450 kmph स्पीड, कितना खतरनाक है इंडियन आर्मी का 'अग्निवेग' अटैक ड्रोन?

भारतीय सेना को मिला नया लोइटरिंग म्यूनिशन. (AI इमेज)

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Indian Army kamikaze drones: दुश्मन के इलाके में लंबी दूरी तक सटीक और तेज हमला करने के लिए भारतीय सेना को एक खास 'लोइटरिंग म्यूनिशन' मिला है. भारत की निजी डिफेंस मैन्युफैक्चरर कंपनी SMPP ने भारतीय सेना को 106 टर्बोजेट-पावर्ड  'पीसकीपर' या 'अग्निवेग' अटैक ड्रोन सौंप दिए हैं. सेना को डिलीवर किए गए 106 ड्रोन्स में में 100 ऑपरेशनल यूनिट और छह ट्रेनिंग सिस्टम शामिल हैं. ये नया हथियार कितना घातक और खतरनाक है, आइये जानते हैं विस्तार से. 

क्या है 'अग्निवेग' ड्रोन?

'पीसकीपर' या 'अग्निवेग' लोइटरिंग म्यूनिशन को दिल्ली की डिफेंस मैन्युफैक्चरर कंपनी SMPP लिमिटेड ने बनाया है. न्यूजेबल एशियानेट न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, 'अग्निवेग' ड्रोन एक वन-वे कामिकेज सिस्टम है. इसकी रेंज 180 किमी है और यह 450 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से उड़ान भर सकता है. सेना ने जब इस ड्रोन के यूजर ट्रायल किए थे तब इसने अपनी क्षमता दिखाई थी. ये लोइटरिंग म्यूनिशन जैमिंग और GPS स्पूफिंग जैसी इलेक्ट्रॉनिक रूप से चुनौतीपूर्ण स्थितियों में भी काम कर सकता है. 'अग्निवेग' पांच मीटर से कम का 'सर्कुलर एरर प्रोबेबल' मेंटेन करता है जो हमले की सटीकता को मापने का एक पैमाना है.


'अग्निवेग' ड्रोन की सबसे बड़ी ताकत

'अग्निवेग' ड्रोन की सबसे बड़ी ताकत इसकी रफ्तार है. यह सिस्टम टर्बोजेट-पावर्ड है जो इसे बाकी सिस्टम्स से अलग बनाता है. फिलहाल सेना के पास मौजूद ज्यादातर लोइटरिंग म्यूनिशन में बैटरी-इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन का इस्तेमाल होता है. SMPP इस सिस्टम की सफलता को देखते हुए इसका एक लॉन्ग रेंज वर्जन बनाने की तैयारी भी कर रहा है. 

भारतीय सेना की ताकत कैसे बढ़ाएगा 'अग्निवेग'? 

अग्निवेग ड्रोन की रेंज और रफ्तार सेना की हमलावर क्षमता बढ़ाने के लिए बेहद अहम हो सकती है. पाकिस्तान के ज्यादातर सैन्य ठिकाने लाइन ऑफ कंट्रोल और इंटरनेशनल बॉर्डर से 100 से 150 किमी के दायरे में ही हैं. अग्निवेग की रेंज 180 किमी है. ये लोइटरिंग म्यूनिशन पाकिस्तानी चौकियों को आसानी से निशाना बना सकता है. 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान ये काम इजरायल में बने ड्रोन्स ने किया था. भविष्य के युद्धों या सैन्य ऑपरेशंस में ये भूमिका भारत में डिजाइन किए गए और बनाए गए ड्रोन निभाएंगे. 

क्या है सेना की ड्रोन डाक्ट्रिन?

2025 में 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद से भारतीय सेना ने ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन शामिल करने की रफ्तार बढ़ा दी है. अप्रैल 2026 की शुरुआत में सेना ने अनमैन्ड एरियल सिस्टम और लॉइटरिंग म्यूनिशन के लिए एक व्यापक टेक्नोलॉजी रोडमैप जारी किया था. इसके तहत अगले पांच सालों में 30 अलग-अलग तरह के ड्रोन खरीदना और देश में बने हजारों डोन के तैनात करने का लक्ष्य है. 

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