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2016 में शुरुआत, आज भारत में स्टार्टअप्स का आंकड़ा 2 लाख के पार, फ्रांस में दिखा डीप-टेक इंडिया का दम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत इनोवेट्स ईयर 2026 में अपने संबोधन में भारत और फ्रांस के सहयोग की कई उपलब्धियां गिनाई. पीएम मोदी ने कहा कि भारत और फ्रांस वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए लगातार मिलकर काम कर रहे हैं. 

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2016 में शुरुआत, आज भारत में स्टार्टअप्स का आंकड़ा 2 लाख के पार, फ्रांस में दिखा डीप-टेक इंडिया का दम

फ्रांस में दिखा डीप-टेक इंडिया का दम

(Credit Image AI)

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.फ्रांस के नीस शहर में भारत इनोवेट्स 2026 का कार्यक्रम हुआ.
.भारत इनोवेट्स ईयर में 4000 आवेदकों से में देश की 120 स्टार्टअप कंपनियों ने अपनी जगह बनाई है.
.IIT Bombay के 137 स्टार्टअप्स को चुना गया.
.10 साल में भारत में स्टार्टअप्स की संख्या 2 लाख के पार 

फ्रांस के नीस शहर में आयोजित भारत इनोवेट्स 2026 प्रदर्शनी का रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एक साथ उद्घाटन किया. तीन दिनों तक चलने वाली इस प्रदर्शनी में पीएम ने भारत की तकनीकी क्षमता और इनोवेशन पावर को दुनिया के सामने पेश किया . भारत-फ्रांस इनोवेट्स 2026 के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में देश के 120 डीप-टेक स्टार्टअप्स, निवेशकों और रिसर्च संस्थानों ने हिस्सा लिया. इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इनोवेशन आज भारत की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है. देश इसी की तकनीक आधारित समाधानों के साथ तेजी से उभर रहा है. इनोवेशन हर सेक्टर में किया जा रहा है. अपने इनोवेशन के दाम पर विश्व में अपनी एक अलग पहचान बरा रहा है.

स्पेस और डिफेंस सेक्टर के स्टार्टअप्स का दबदबा

भारत इनोवेट्स 2026 में चुने गए स्टार्टअप्स में सबसे बड़ी हिस्सेदारी स्पेस और डिफेंस सेक्टर की रही. इसके बाद हेल्थकेयर एवं मेडटेक, ऊर्जा और एडवांस्ड कंप्यूटिंग से जुड़े स्टार्टअप्स रहा.बायोटेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग और सेमीकंडक्टर जैसे उभरते क्षेत्रों की भी मजबूती देखने को मिली.

4,000 आवेदनों में से चुने गए 120 स्टार्टअप

इस कार्यक्रम के लिए देशभर के उच्च शिक्षण और तकनीकी संस्थानों से जुड़े करीब 4,000 डीप-टेक स्टार्टअप्स ने आवेदन किया था. इनमें से सिर्फ 120 स्टार्टअप्स को चुना गया, लेकिन इन्हें सभी सिर्फ ऐसे ही नहीं चुना गया, इसके लिए कई जांच और पात्रता को पूरा करना पड़ा. इसके लिए सबसे पहले टेक्किल तैयारी और संस्था की पात्रता जांची गई. इसके बाद एक्सपर्ट्स ने इनोवेशन, व्यावसायिक संभावनाओं, इसके विस्तार की क्षमता और सामाजिक प्रभाव जैसे मानकों पर स्टार्टअप्स का मूल्यांकन किया.

IIT Bombay के 137 स्टार्टअप्स को चुना गया

13 अलग-अलग तकनीकी विषयों के आधार पर स्टार्टअप्स को शॉर्टलिस्ट किया गया. इनमें से 137 स्टार्टअप्स को आईआईटी बॉम्बे में आयोजित प्री-समिट कार्यक्रम के लिए चुना गया, जहां उन्हें मेंटरशिप, प्रदर्शनी और इन्वेस्टर्स से बातचीत का अवसर मिला. इसी के बाद आखिरी में 120 स्टार्टअप्स को नीस में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया.

10 साल में स्टार्टअप्स की संख्या 2 लाख के पार

पिछले एक दशक में भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम बहुत ही तेज रफ्तार से बढ़ा है. उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या 2016 में जहां कुछ सौ के आसपास थी, वहीं 2025 तक यह आंकड़ा 2 लाख से पार चला गया है. यह बढ़ोतरी सिर्फ कंपनियों की संख्या में तक सीमित नहीं रही, बल्कि रोजगार की बढ़ोतरी में इसका अहम योगदान रहा है. 

22 लाख नौकरी के अवसर पैदा किये

मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स द्वारा पैदा किए गए रोजगारों की संख्या 2016 में महज 308 थी, मात्र 4 सालों में 2020 तक बढ़कर करीब 4.9 लाख हो गई. वहीं 10 साल में यानी 2025 के आखिरी तक स्टार्टअप्स देशभर में लगभग 21.9 लाख नौकरियां पैदा कर चुके हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि स्टार्टअप इकोसिस्टम अब सिर्फ निवेश आकर्षित करने का माध्यम नहीं रहा, बल्कि यह रोजगार और आर्थिक विकास का बड़ा ​जरिया बन गया है. 

वैश्विक मंच पर दिखी तस्वीर और जमीनी हकीकत में अंतर

दिलचस्प बात यह है कि भारत इनोवेट्स 2026 में जिन क्षेत्रों के स्टार्टअप्स सबसे ज्यादा दिखाई दिये, वे भारत के सबसे बड़े स्टार्टअप सेक्टर नहीं हैं. देश में DPIIT से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स का सबसे बड़ा हिस्सा आईटी सर्विसेज से जुड़ा है, जिसकी हिस्सेदारी करीब 20 प्रतिशत है. इसके बाद हेल्थकेयर और लाइफ साइंसेज, एजुकेशन, एग्रीकल्चर, कंस्ट्रक्शन और फूड एंड बेवरेज सेक्टर से जुड़े हैं. वहीं स्पेस, डिफेंस और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्र, जो भारत इनोवेट्स 2026 के बड़ा आकर्षण रहे, अभी कुल स्टार्टअप संख्या के लिहाज से थोड़े छोटे हैं. हालांकि इन सभी क्षेत्रों को भविष्य की रणनीतिक और उच्च तकनीक अर्थव्यवस्था का आधार माना जा रहा है. यही वजह है कि भारत दुनिया के बड़े  निवेशकों के सामने अपनी अगली पीढ़ी की तकनीकी क्षमता को इन्हीं सेक्टरों के माध्यम से प्रदर्शित कर रहा है.

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