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चीन-पाकिस्तान पर 24 घंटे रहेगी नजर, जानिए क्या है EOS-05 मिशन जो 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई से करेगा निगरानी

EOS-05 को लगभग 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में स्थापित किया जाएगा. इतनी ऊंचाई से EOS-05 किसी भी बड़े इलाके पर लगातार नजर रख सकता है. अंतरिक्ष से बार-बार और लगातार तस्वीरें उपलब्ध कराकर ये सीमा पर पाक-चीन की हर गतिविधि की अपडेट देगा.

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चीन-पाकिस्तान पर 24 घंटे रहेगी नजर, जानिए क्या है EOS-05 मिशन जो 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई से करेगा निगरानी

EOS-05 मिशन 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई से करेगा निगरानी.  (फोटो-IANS)

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  • EOS-05 जिओस्टेशनरी ऑर्बिट में स्थापित किया जा रहा है
  • EOS-05 को 36,000 किमी की ऊंचाई पर स्थापित किया जाएगा
  • हमेशा एक ही क्षेत्र पर लगातार निगरानी रख सकता है EOS-05

EOS-05 mission: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) 4 सितंबर को तड़के 2:55 बजे सतीश धवन स्पेस सेंटर से जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में अपना पहला इमेजिंग सैटेलाइट लॉन्च करने जा रहा है. इसे EOS-05 मिशन नाम दिया गया है. ईओएस-05 मिशन के तहत अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट को जीएसएलवी-F17 रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा. EOS-05 मिशन से देश की निगरानी क्षमता में कई गुना इजाफा होगा. इस सैटेलाइट की मदद से भारत पृथ्वी के एक ही हिस्से, जिसमें की सीमाएं और रणनीतिक इलाके शामिल हैं, पर लगातार नजर रख सकेगा. आइये जानते हैं EOS-05 मिशन की खास बातें.  

EOS-05 मिशन इतना खास क्यों है?

अब तक भारत के अधिकांश अर्थ ऑब्जर्वेशन या निगरानी उपग्रह लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) में स्थित हैं. ये उपग्रह पृथ्वी का चक्कर लगाते हैं और किसी एक विशेष क्षेत्र की तस्वीरें दोबारा लेने में घंटों या दिनों का समय लेते हैं. EOS-05 भारत का पहला ऐसा इमेजिंग सैटेलाइट है जिसे जियोसिंक्रोनस या जिओस्टेशनरी ऑर्बिट में स्थापित किया जा रहा है. ये इमेजिंग सैटेलाइट लगभग 36,000 किमी की ऊंचाई पर स्थापित किया जाएगा.  इस ऊंचाई पर उपग्रह पृथ्वी की घूर्णन गति के साथ तालमेल बिठाकर हमेशा एक ही क्षेत्र पर लगातार निगरानी रख सकता है. 

भारत की सुरक्षा की दृष्टि से कितना अहम है EOS-05 मिशन?

जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में होने के कारण यह सैटेलाइट चीन तथा पाकिस्तान से लगी सीमाओं पर लगातार निगरानी रख सकता है. किसी भी संदिग्ध सैन्य हलचल, बुनियादी ढांचे के निर्माण या सेनाओं की मूवमेंट की स्थिति में यह रियल-टाइम (या बहुत कम समय के अंतराल में) तस्वीरें और डेटा प्रदान करेगा. EOS-05 में आधुनिक मल्टीस्पेक्ट्रल और हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजर लगे हैं. जियोस्टेशनरी ऑर्बिट में होने के बावजूद, इसके एक कैमरे की रिज़ॉल्यूशन  42 मीटर प्रति पिक्सेल है. ये जियोस्टेशनरी ऑर्बिट के लिए दुनिया के सबसे हाई रिज़ॉल्यूशन कैमरों में से एक है.

आपदा निगरानी में मदद

रक्षा के अलावा, यह उपग्रह नागरिक और पर्यावरणीय कार्यों में भी बड़ी भूमिका निभाएगा. चक्रवात, अचानक आई बाढ़, जंगलों की आग या भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं की रियल-टाइम ट्रैकिंग कर सकेगा. यह फसलों की सेहत की निगरानी, जल संसाधनों का प्रबंधन और मौसम के तेजी से बदलते पैटर्न पर नजर रख सकता है. 

जवाहरलाल नेहरू प्लेनेटेरियम के डायरेक्टर और इसरो के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. बीआर गुरुप्रसाद के अनुसार, ईओएस-05 सैटेलाइट 30 हजार किलोमीटर की ऊंचाई वाले ऑर्बिट से धरती की निगरानी करेगा. इसकी क्षमता बहुत ज्यादा है. इस उपग्रह को जिस जीएसएलवी-एफ 17 राकेट से लॉन्च किया जाएगा उसकी ये 19वीं उड़ान है. जुलाई 2025 में इसी जीएसएलवी ने नासा इसरो सिंथेटिक अपरचर रडार को लॉन्च किया था.

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