भारत
पिनाका-IV रॉकेट ज़्यादा दूर और अहम टारगेट को सटीकता से निशाना बना सकेंगे. पिनाका IV के प्रारंभिक डेवलपमेंटल एवं प्री-प्रोडक्शन ट्रायल्स शुरू होने की उम्मीद है. इसे 2030 तक भारतीय सेना में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है.
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) स्वदेशी गाइडेड रॉकेट पिनाका का ऐसा वैरियंट बना रहा है जिसकी रेंज में आधा पाकिस्तान होगा. DRDO पिनाका IV का विकास कर रहा है. ये एक अत्यंत शक्तिशाली और अगली पीढ़ी का गाइडेड रॉकेट सिस्टम है. इस प्रोजेक्ट के बारे में कुछ अहम जानकारियां सामने आई हैं जिससे पता चलता है कि पिनाका IV भारत की स्वदेशी तोपखाने और लॉन्ग-रेंज स्ट्राइक क्षमताओं में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होने जा रहा है.
इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिनाका Mk-1, पिनाका Mk-2 और गाइडेड पिनाका Mk-3 का आकार लगभग 214 mm से 300 mm तक था. लेकिन इनसे अलग पिनाका IV के लिए 370 mm रॉकेट मोटर का उपयोग किया जा रहा है. बड़े डायमीटर वाले रॉकेट मोटर का मुख्य फायदा ये है कि इसमें ज्यादा प्रोपेलेंट ले जाया जा सकता है.
पिनाका IV की रेंज भारत के किसी भी मौजूदा या भविष्य के रॉकेट आर्टिलरी सिस्टम की क्षमता से कहीं ज्यादा होगी. ये 300 किलोमीटर की दूरी तक हमला करने में सक्षम होगा. पिनाका IV की लंबी रेंज भारतीय सेना को डीप स्ट्राइक क्षमता देगी. पाकिस्तान के ज्यादातर सैन्य ठिकाने इस रेंज में आते हैं. यहां तक कि पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद और सैन्य मुख्यालय रावलपिंडी भी इसकी रेंज में होंगे. 300 किलोमीटर रेंज वाला पिनाका IV गाइडेड रॉकेट तिब्बत में चीनी सेना के सैन्य ठिकानों और हथियार भंडार केंद्रों को भी निशाना बनाने की ताकत देता है.
पिनाका-4 की सबसे बड़ी खासियत इसकी क्वासी-बैलिस्टिक ट्रैजेक्टरी होगी. ये पारंपरिक रॉकेट की तरह एक सीधे या अनुमानित रास्ते पर नहीं उड़ेगा. भारत की प्रलय की ही तरह पिनाका IV रॉकेट भी 'क्वासी-बैलिस्टिक' मार्ग अपनाएगा. ये उड़ान के दौरान बीच में अपना रास्ता बदल सकता है. इससे दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम के लिए इसे ट्रैक करना और हवा में नष्ट करना लगभग असंभव हो जाएगा.
पाकिस्तान ने इसी तरह का रॉकेट सिस्टम बनाया है जिसे फतेह-2 नाम दिया गया है. माना जाता है कि फतेह-2 की रेंज 300 से 400 किमी है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने दिल्ली को निशाना बनाने के लिए इस रॉकेट को लॉन्च किया था लेकिन इसे हरियाणा में सिरसा के पास मार गिराया गया. हालांकि, फतेह-2 क्वासी-बैलिस्टिक ट्रैजेक्टरी को नहीं अपनाता इसलिए इसे ट्रैक करना और इंटरसेप्ट करना आसान है.
पिनाका IV में डीआरडीओ की रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) द्वारा विकसित उन्नत इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (INS) और GPS/NavIC सैटेलाइट गाइडेंस का उपयोग किया गया है. 300 किमी की दूरी पर भी इस रॉकेट की सटीकता 10 मीटर (CEP) से कम होगी. यह पिन-पॉइंट सटीकता के साथ लक्ष्य को भेद सकता है. पारंपरिक शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलों और क्रूज मिसाइलों की तुलना में पिनाका IV का उत्पादन भी किफायती है.