भारत
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत दो नए परमाणु सिस्टम बना रहा है जो लगभग पूरे होने वाले हैं. इन्हें एक या दो साल के भीतर सेना में शामिल कर लिया जाएगा.
India modernize nuclear arsenal: भारत अपनी परमाणु ताकत लगातार बढ़ा रहा है. भारत के पास जमीन से, आसमान से और समंदर के नीचे से परमाणु हमला करने की क्षमता है. एक अमेरिकी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अभी नौ अलग-अलग परमाणु सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा है. इसमें दो तरह के विमान, छह जमीन से मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइलें और एक समुद्र से मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल शामिल हैं. इस रिपोर्ट में कुछ ऐसी जानकारियां भी दी गई हैं जो चीन और पाकिस्तान जैसे दुश्मनों की नींद उड़ा सकती हैं. आइये जानते हैं इसके बारे में.
'न्यूक्लियर नोटबुक' पर एक रिसर्च छपी है जिसे 'फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स' के शोधकर्ताओं ने लिखा है. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत अपने परमाणु हथियारों के जखीरे को आधुनिक बनाने का काम जारी रखे हुए है और हाल के वर्षों में कई नए हथियार सिस्टम तैनात किए गए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, भारत कई अन्य सिस्टम विकसित भी कर रहा है. इसमें बताया गया है कि भारत ने 140 से 225 परमाणु वॉरहेड के लिए पर्याप्त सैन्य प्लूटोनियम का उत्पादन किया है जिससे 190 तक वॉरहेड तैयार किए जा सकते हैं.
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत दो नए परमाणु सिस्टम बना रहा है जो लगभग पूरे होने वाले हैं. इन्हें एक या दो साल के भीतर सेना में शामिल कर लिया जाएगा. इसमें कहा गया है कि भारत ने कभी भी अपने परमाणु हथियारों के भंडार के आकार का खुलासा नहीं किया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत उन चुनिंदा देशों में से एक है जिनके बारे में माना जाता है कि वे अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम (HEU) और हथियार-ग्रेड प्लूटोनियम, दोनों का उत्पादन कर रहे हैं.
माना जाता है कि भारत का HEU उत्पादन मुख्य रूप से परमाणु-संचालित जहाजों और पनडुब्बियों की बढ़ती संख्या के लिए ईंधन बनाने पर केंद्रित है.
भारत में हथियार-ग्रेड प्लूटोनियम का स्रोत मुंबई के पास भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र परिसर में स्थित पुराना 100-मेगावाट (MWt) ध्रुव प्लूटोनियम उत्पादन रिएक्टर रहा है. 2010 तक इसी स्थान पर CIRUS रिएक्टर भी इसका स्रोत था. एक दशक से अधिक की देरी के बाद, कलपक्कम के पास इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र में भारत का नया 500-MWt प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर अप्रैल 2026 में पहली बार क्रिटिकैलिटी तक पहुंचा.
2026 की शुरुआत तक, इंटरनेशनल पैनल ऑन फिसाइल मैटेरियल्स का अनुमान था कि भारत ने लगभग 730 किलोग्राम हथियार-ग्रेड प्लूटोनियम का उत्पादन किया है. प्रति वॉरहेड लगभग 4 किलोग्राम प्लूटोनियम की मात्रा को आधार मानें, तो यह सैद्धांतिक रूप से 140 से 225 परमाणु वॉरहेड के उत्पादन के लिए पर्याप्त होगा. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने किस तरह के वॉरहेड डिजाइन बनाए हैं, इस बारे में कोई जानकारी नहीं है और ये बेहद गुप्त है.