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जोधपुर में होने वाले वायुसेना अभ्यास 'Veer Guardian 26' के लिए जापानी F-2A फाइटर जेट पहली बार भारत आ रहे हैं. दोनों देशों के बीच यह सैन्य सहयोग का नया अध्याय है.
Veer Guardian 26 Jodhpur: भारतीय वायु सेना (IAF) और जापान एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स (JASDF) के बीच रक्षा सहयोग को एक नई ऊंचाई देते हुए आगामी 11 सितंबर से राजस्थान के जोधपुर में एक बड़ा संयुक्त हवाई अभ्यास आयोजित होने जा रहा है. 'Veer Guardian 26’ नाम का यह द्विपक्षीय लड़ाकू विमान युद्धाभ्यास जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन पर 9 से 21 सितंबर 2026 तक चलेगा.
इस अभ्यास की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक विशेषता यह है कि पहली बार जापान के लड़ाकू विमान किसी संयुक्त सैन्य अभ्यास में हिस्सा लेने के लिए भारतीय हवाई अड्डे से उड़ान भरेंगे.
इस युद्धाभ्यास में भाग लेने के लिए जापान एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स अपने तीन अत्याधुनिक F-2A लड़ाकू विमान भारत भेज रही है. इनके साथ ही जापान के लगभग 110 वायु सेना कर्मी भी जोधपुर पहुंचेंगे. ये जापानी फाइटर जेट भारतीय वायु सेना के विभिन्न लड़ाकू विमानों और अन्य परिचालन संपत्तियों के साथ मिलकर कई जटिल हवाई युद्ध अभ्यासों में हिस्सा लेंगे.
Veer Guardian 26 दोनों वायु सेनाओं को एक बेहतरीन प्रशिक्षण माहौल में एक साथ काम करने, अपने परिचालन अनुभवों को साझा करने और युद्ध कौशल को और अधिक निखारने का एक बेहतरीन अवसर प्रदान करेगा.
युद्धाभ्यास के दौरान दोनों देशों के लड़ाकू विमान पश्चिमी राजस्थान के आसमान में अपनी ताकत दिखाएंगे. इस अभ्यास का मुख्य ध्यान हवाई युद्ध रणनीतियों, मिशन प्लानिंग, आपसी संचार और जटिल समन्वित ऑपरेशन्स पर केंद्रित रहेगा.
जोधपुर में आयोजित हो रहे इस प्रशिक्षण से दोनों देशों के पायलटों और तकनीकी स्टाफ के बीच आपसी समन्वय को बेहतर बनाने और सामरिक तकनीकों को समझने में बड़ी मदद मिलेगी. अधिकारियों के अनुसार, इस अभ्यास को देखने के लिए भारत और जापान दोनों देशों के वायु सेना प्रमुख और कई अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारी भी जोधपुर आ सकते हैं.
यह 'Veer Guardian' हवाई युद्धाभ्यास का दूसरा संस्करण है, जबकि पहला संस्करण जनवरी 2023 में जापान के हवाई क्षेत्र में आयोजित किया गया था. अब तीन साल बाद इसका दूसरा संस्करण भारत की मेजबानी में राजस्थान के रेतीले धोरों के बीच आयोजित हो रहा है.
पहली बार जापानी F-2A लड़ाकू विमानों का भारतीय हवाई अड्डे से उड़ान भरना और भारतीय वायु सेना के साथ युद्धाभ्यास करना रक्षा कूटनीति के क्षेत्र में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर साबित होगा. यह अभ्यास दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच परिचालन समझ को बढ़ाने और भाग लेने वाले सैन्य कर्मियों के बीच अधिक विश्वास का निर्माण करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.