भारत
Satellite Surveillance Grid: भारत अपना खुद का मिलिट्री स्पेस आर्किटेक्चर तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. एक खास योजना के तहत साल 2032 तक 52 सैटेलाइट लॉन्च किए जाएंगे जो पृथ्वी की निचली कक्षा में रहकर सीमाओं की पहरेदारी करेंगे.
Space Based Surveillance: भारत अपनी सीमाओं और समुद्री रास्तों पर 24 घंटे नजर रखने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है. भारत अब ब एक मजबूत मिलिट्री स्पेस आर्किटेक्चर बनाने की दिशा में बढ़ रहा है. इसके लिए केंद्र सरकार ने 'स्पेस बेस्ड सर्विलांस फेज III' पहल के तहत 52 सैटेलाइट के एक समूह को मंजूरी दी है. इन 52 सैटेलाइट में से 31 सैटेलाइट प्राइवेट सेक्टर द्वारा बनाए और तैनात किए जाएंगे.
भारत की जमीनी और समुद्री सीमाएं बेहद विशाल हैं. दुर्गम इलाकों से गुजरने वाली इतनी बड़ी सीमा पर नजर रखना आसान नहीं है. इसके लिए भारत 'आखिरी सीमा' (final frontier) कहे जाने वाले अंतरिक्ष में अपना मोर्चा मजबूत करने जा रहा है. भारत धीरे-धीरे 2032 तक 52 सैटेलाइट अंतरिक्ष में लॉन्च करेगा. इस सैटेलाइट समूह का मकसद लगातार इंटेलिजेंस, सर्विलांस और टोही जानकारी जुटाना होगा. इनकी मदद से सुरक्षित कम्युनिकेशन भी सुनिश्चित किया जाएगा.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का ये महात्वाकांक्षी योजना कोलकाता में 2025 में हुई 'कंबाइंड कमांडर्स कॉन्फ्रेंस' में घोषित 'जॉइंट मिलिट्री स्पेस डॉक्ट्रिन' पर आधारित है. इसके तहत औपचारिक रूप से अंतरिक्ष शक्ति को भारत की युद्ध-रणनीति में शामिल करने की योजना है.
इस योजना के तहत पृथ्वी की निचली कक्षा में दर्जनों छोटे उपग्रह लॉन्च किए जाएंगे. ये उपग्रह सिंथेटिक-एपर्चर रडार को हाई रिजोल्यूशन ऑप्टिकल सेंसर के साथ जोड़ेंगे. इनकी निगरानी क्षमता किसी भी मौसम में कम नहीं होगी. यहां तक कि ये सैटेलाइट बादलों के पार भी देख पाएंगे. इससे सीमाओं की 24 घंटे निगरानी संभव हो पाएगी. सिंथेटिक-एपर्चर रडार से लैस सैटेलाइट बेहद साफ और सटीक तस्वीरें निकालने में सक्षम होते हैं. अभी तक यह क्षमता दुनिया के चुनिंदा देशों के पास ही है. इस क्षमता से लैस सैटेलाइट अंतरिक्ष से ही जमीन को भी स्कैन कर सकते हैं और वहां मौजूद मिट्टी के प्रकार और किसी भी तरह के खतरों का मूल्यांकन कर सकते हैं. सेना की मूवमेंट में क्षमता और तकनीक बेहद मददगार साबित हो सकती है.
भारत की संशोधित स्पेस पॉलिसी 2026 के तहत प्राइवेट सेक्टर को अब बड़ी भूमिका दी गई है. निजी कंपनियों और स्टार्टअप को मिलिट्री-ग्रेड कॉन्स्टेलेशन बनाने और उनके रखरखाव के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. दुनिया के कई देश ऐसी ही नीति फॉलो कर रहे हैं जिसमें अमेरिका और ब्रिटेन भी शामिल हैं. सैन्य रणनीतिकारों ने ये समझा है कि युद्ध का दायरा अब स्पेस और साइबर डोमेन तक बढ़ रहा है. ऐसे में भारत भी स्पेस में डिस्ट्रिब्यूटेड आर्किटेक्चर' अपना रहा है जिससे नागरिक सेवाओं के साथ-साथ मिलिट्री ऑपरेशन्स में भी मदद मिले. भारत जो मजबूत और कई परतों वाला मिलिट्री स्पेस आर्किटेक्चर तैयार कर रहा है उससे सुनिश्चित होगा कि भविष्य के संघर्ष भारतीय सेनाएं दुश्मन से दो कदम आगे रहें.